आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषण देने के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी अमित शाह के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। पहला मुकदमा शामली और दूसरा बिजनौर में दर्ज हुआ है।
कैराना लोकसभा क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी डीएम एनपी सिंह ने बताया कि तीन अप्रैल को शामली में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने विवादास्पद बयान दिया था। मामला सुर्खियों में आने पर उन्होंने कार्यक्रम की सीडी लखनऊ मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजी गई है। फिलहाल वहां से कोई आदेश नहीं मिले हैं, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने अपने स्तर से सीडी के आधार पर विधि विशेषज्ञों से राय ली। भाषण की व्याख्या करने पर निष्कर्ष निकला कि उनके भाषण में कई बातें आपत्तिजनक थी, इसलिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 125 के तहत आदर्श मंडी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
एसओ ने बताया कि वर्गों के बीच धर्मनिरपेक्ष टिप्पणी करने की धारा बनती है। दरअसल प्रशासन ने सीडी देखने के बाद विश्लेषण किया है कि शाह के भाषण में बदला लेना होगा, जैसे शब्दों का प्रयोग आपसी वैमनस्य फैलाने वाले हैं, इसलिए ही निर्वाचन अधिकारी के आदेश पर यह मुकदमा लिखा गया है। गौरतलब है कि शाह से शामली के अलावा बिजनौर आदि में भी इस तरह के बयान दिए थे जिसके बाद सियासत में तूफान मच गया था।
शाह पर दूसरा मुकदमा
बिजनौर कोतवाली में एसडीएम सदर व सहायक रिटर्निंग आफिसर आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने भी शाह के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि शाह ने शुक्रवार को यहां के कान्हा फार्म में हुए दलित सम्मेलन में भड़काऊ भाषण दिए। सपा प्रमुख मुलायम सिंह पर अशोभनीय टिप्पणी की।
अफसरों ने सम्मेलन की अमित शाह की वीडियो क्लीपिंग देखी, जिसमें उन्हें कहते हुए पाया गया कि मायावती ने एक वर्ग विशेष का वोट पाने के लिए जो आपकी प्रताड़ना करता है, आपकी बहन, बेटियों की अवहेलना करता है, उनकी आबरू पर हाथ डालता है, उस वर्ग विशेष को 19 टिकट दे दिए हैं। मित्रों आप बताइए जिन्होंने हमारे समाज का अपमान किया है। हमारे समाज के लोगों की हत्या की है, हमारे युवाओं को मौत के घाट उतारा है, उनके साथ बैठ कर हमारा सम्मान कभी नहीं बढ़ सकता। यदि आप एक मत होकर भाजपा को वोट देते हैं तो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही दूसरे दिन ही मुल्ला मुलायम की सरकार अपने आप गिर जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमित शाह का भाषण प्रथम दृष्टया पूर्व में मुजफ्फरनगर की घटनाओं के संदर्भ में धर्म, संप्रदायों के बीच वैमनस्यता उत्पन्न करने वाला है। अमित शाह और आयोजकों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 125 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।