हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के सात शहरों में 31 मार्च के बाद सेट टॉप बॉक्स के जरिए टीवी चैनलों का प्रसारण की व्यवस्था करने संबंधी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा याचिका में कोई मेरिट नहीं है लिहाजा यह खारिज की जाती है। इससे बिना सेटटॉप बॉक्स के केबल टीवी प्रसारण को तगड़ा झटका लगा है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति डॉ. सतीश चंद्र की खंडपीठ ने सोमवार को यह फैसला यूपी केबल ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन व अन्य की याचिका पर सुनाया।
इसमें केंद्र सरकार की 11 नवंबर 2011 की अधिसूचना को रद्द किए जाने आदि का आग्रह किया गया था।
याचियों का कहना था कि सेट टॉप बाक्स लगाने की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हो सकी है लिहाजा 31 मार्च 2013 की कट ऑफ डेट तय करने संबंधी अधिसूचना रद्द की जानी चाहिए।
उधर केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि सूबे के गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी व इलाहाबाद जिलों में सौ फीसदी डिजिटलाइजेशन का काम हो चुका है अर्थात वहां सेट टॉप बाक्स लग चुके हैं,
जबकि लखनऊ, कानपुर व आगरा में 14 अप्रैल तक 82 से 86 फीसदी तक काम हो चुका है और अब यहां सेट टॉप बाक्स की मांग सीमित हो गई है।
यह भी कहा गया कि बाजार में सेट टॉप बाक्स आसानी से उपलब्ध हैं, ऐसे में तय की गई तारीख बढ़ाए जाने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने फैसले में केंद्र के इस तर्क के मद्देनजर कहा कि उन उपभोक्ताओं के लिए सेट टॉप बाक्स अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक है जो बेहतर सिग्नल या सीमित चैनल चाहते हैं और इसके लिए याची के अलावा अन्य कई सर्विस प्रोवाइडर है। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ याचिका खारिज कर दी।