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आरुषि मर्डर केस: सीढ़ियों पर फैला खून हेमराज का था

Tue, 23 Apr 2013 12:06 PM IST
गाजियाबाद/ब्यूरो
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आरुषि-हेमराज मर्डर केस में क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई एसपी नीलाभ किशोर और जोनल डायरेक्टर जावेद अहमद के कहने पर लगाई गई थी।
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यह खुलासा सोमवार को सीबीआई एएसपी एजीएल कौल ने डिफेंस की जिरह के दौरान किया। डिफेंस अब मंगलवार को भी गवाह से अपनी जिरह जारी रखेगा।

आरुषि-हेमराज मर्डर केस के मुख्य जांच अधिकारी रहे एजीएल कौल सोमवार सुबह सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में पेश हुए। डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर और मनोज शिशौदिया ने एएसपी कौल से जिरह की।

एक सवाल के जवाब में कौल का कहना था कि वह खुद इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना चाहता था।

मैने केस डायरी में अभियुक्तगण डा. दिनेश तलवार और डा. सुशील चौधरी के खिलाफ भी चार्जशीट लगाने की अनुशंसा की थी, मगर सीनियर अधिकारियों (जावेद अहमद और नीलाभ किशोर) ने यह महसूस किया कि इस केस में चार्जशीट के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है। इसीलिए मैने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।
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गवाह ने यह भी बताया कि कोर्ट के समक्ष जो फोटोग्राफ उसे दिखाए गए हैं, उसमें खून के वे निशान हैं, जो हेमराज की लाश को छत से नीचे लाने पर सीढ़ियों पर गिरे थे।

कृष्णा और राजकुमार के टेलीफोन के सीडीआर की क्लोजर रिपोर्ट के साथ प्रेषित नहीं किया क्योंकि वह दोनों अभियुक्त नहीं थे।

एल-32 जलवायु विहार में लगे बेसिक फोन का सीडीआर अंतिम रिपोर्ट के साथ प्रेषित इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि बेसिक टेलीफोन का सीडीआर नहीं होता है।

इसके अलावा मुलजिम की क्लीनिक का डब्ल्यूएलएल फोन नंबर 6479896 का भी सीडीआर नहीं प्राप्त किया।

यह कहना गलत है कि 15 मई 2008 को इस टेलीफोन नंबर से जो दो काल 16:58 बजे और 17:37 बजे हेमराज के मोबाइल नंबर 9213515485 पर किए गए, वह कृष्णा द्वारा किए गए हों।

हेमराज का मोबाइल पंजाब राज्य की सीमा में एक्टिव पाया गया था।

टाटा टेलीकॉम से जानकारी करने पर पता चला कि हेमराज के मोबाइल पर एक एसएमएस घटना के बाद भेजा गया था। इसका उल्लेख केस डायरी में किया है, लेकिन इस संबंध में कोई कागज अंतिम रिपोर्ट के साथ कोर्ट नहीं भेजा गया।
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गवाह ने बताया कि सीएफएसएल के डा. राजेंद्र सिंह ने ड्रैगिंग का डमी टेस्ट किया था। मैं उन्हें सुझाव नहीं दे सकता था कि डमी टेस्ट के लिए एक औरत और एक मर्द का इस्तेमाल करना है।

इस बिंदु पर किसी का बयान दर्ज नहीं किया गया कि किस डमी व्यक्ति को चादर में लपेटकर नीचे से छत पर ले जाया गया और छत में उसे किसकेद्वारा घसीटा गया।

डमी टेस्ट की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी राजेंद्र सिंह ने कराई थी, लेकिन उन्होंने अपनी रिपोर्ट के साथ फोटोग्राफ और वीडियोग्राफ नहीं भेजे थे।

गवाह का कहना था कि डा. एमएस दहिया के साथ घटनास्थल पर जाने का उल्लेख केस डायरी में किया है। घटना स्थल का निरीक्षण करने का मेमो मैने नहीं बनाया था।
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