फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाघिन का कहर जारी, किया पांचवा शिकार

Fri, 10 Jan 2014 12:54 AM IST
अमर उजाला, मुरादाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
न हाथी काम आए और न हथियार। वन विभाग की टीमें सर्च करती रह गईं और आदमखोर बाघिन ने बुधवार को एक महिला को मारा डाला। आतंक का पर्याय बनी बाघिन 11 दिनों में कुल पांच लोगों को मार चुकी है।
विज्ञापन


बुधवार को गन्ना छील रही दरियापुर गांव की महिला की गर्दन मुंह में दबाकर बाघिन खेत में घसीटकर ले गई। चीख सुन दौड़े एक रिटायर्ड फौजी के शोर मचाने पर बाघिन भाग गई। जब तक लोग लेकिन तब तक महिला दम तोड़ चुकी थी।

घटना के बाद वन विभाग की नाकामी से गुस्साए लोगों ने हरिद्वार रोड जाम लगाकर हंगामा किया। चार दिनों में बाघिन ने कांठ तहसील में तीन लोगों की जान ले ली।

इससे पहले 5 जनवरी को चंगेरी गांव में राजीव विश्नोई को, 7 जनवरी को गांव मल्लीवाला में किशोरी शोभा को मार डाला था। लगातार हमले से घबराए वन विभाग ने पूरी तैयारी से बुधवार को अभियान चलाया।
विज्ञापन


टीम मल्लीवाला से दोपहर 12 बजे महलकपुर मार्ग पर पहुंची ही थी कि बाघिन ने सात किलोमीटर दूर दरियापुर के जंगल में गन्ने से अगोला काट रही सुरेश कुमार की पत्नी दुलारी देवी (35) पर हमला कर दिया।

शोर सुन ग्रामीण पहुंचने ही वाले थे कि बाघिन बिजनौर की ओर भाग गई। सूचना पर बाद में पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।

वन विभाग द्वारा मंगाए गए हाथी उस स्थान पर नहीं घुसे, जहां बाघिन होने का संदेह था। इस पर ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। कस्बे में बस स्टैंड पर लोगों ने शव रखकर जाम लगा दिया। बाद में अधिकारियों के आश्वासन पर शाम को जाम खोला गया।

पांच को मारने के बाद आदमखोर का सर्टिफिकेट
एक एक करके पांच जिंदगियां खत्म करने वाली बाघिन को ग्यारह दिन बाद विभाग ने भी आदमखोर मान ही लिया। अब उसे मारने के लिए परमिट जारी होगा।

उस एक्सपर्ट शिकारियों को ‘शूटआउट’ के लिए परमिट उसे दिया जाएगा जिसके पास 0.375 बोर की मैगनम रायफल हो। वन संरक्षक कमलेश कुमार ने संस्तुति रिपोर्ट राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भेज दी है।

11 दिन में बाघिन देख भी नहीं पाए अफसर
वन विभाग के लिए यह ऑपरेशन शर्मनाक साबित हो रहा है। जिस बाधिन को पकड़ने के लिए 11 दिनों से पूरी ताकत झोंक दी गई हो उसे वन विभाग की टीम देख भी नहीं पाई है।

टीम सिर्फ पदचिह्न देखकर कागजी कर कर रही है। 29 दिसंबर को मिठनपुर मौजा में युवक को बाघिन ने मारा था तब वन विभाग की नींद टूटीं। कभी लखनऊ कभी कार्बेट तो कभी नैनीताल तो कभी दुधवा की टीम आने की बातें हुईं।
विज्ञापन


पहले पिंजरे लगाए गए...बाद में जेसीबी से बाघिन ढूंढने का नाटक चला। खौफ बढ़ता रहा और ऑपरेशन चलता गया और मौतों का सिलसिला रुका नहीं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें