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यूपी: टीईटी के बिना नहीं बन सकेंगे सहायक अध्यापक

Sat, 01 Jun 2013 12:16 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
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सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उठे विवाद का अंत हो गया है।
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हाईकोर्ट की फुलबेंच ने कहा है कि सहायक अध्यापक नियुक्त होने के लिए टीईटी अनिवार्य है।

परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसा कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं हो सकता जो टीईटी की अर्हता न रखता हो।

फुलबेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा प्रभाकर सिंह केस में दिए निर्णय के उस हिस्से को अमान्य कर दिया है जिसमें बीएड डिग्री धारकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी गई थी।

टीईटी को मात्र अर्हता परीक्षा बताने पर राज्य सरकार के दावे को खारिज करते हुए फुलबेंच ने कहा कि यह शैक्षणिक और प्रशिक्षण योग्यता के साथ ही एक अनिवार्य योग्यता है।
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न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी, न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की पूर्णपीठ ने एनसीटीई द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना को वैध करार दिया है।

फैसले में कहा गया है कि 23 अगस्त की अधिसूचना की उपधारा 3(अ) उसका एक हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि इस उपधारा में वर्णित वर्ग टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त होगा।

23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी होने के बाद नियुक्त हुए अध्यापकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि कानून जिस रूप में है उसी रूप में लागू होना चाहिए। राज्य सरकार की लापरवाही के कारण उसमें ढील नहीं दी जा सकती है।

फुलबेंच ने प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ द्वारा एनसीटीई को न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने हेतु अधिकृत करार देने के निर्णय को सही ठहराया है।

इस बात को भी सही माना है कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 लागू होने के बाद न्यूनतम अर्हता निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार मुक्त नहीं है। मगर इसी फैसले के उस हिस्से को गलत बताया जिसमें बीएड डिग्री धारकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं माना गया है।

शिक्षकों की नियुक्ति पर खंडपीठ करेगी फैसला
फुलबेंच द्वारा सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता घोषित करने के बाद प्रदेश में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने की दिशा साफ हो गई है।
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मगर 72,825 सहायक अध्यापकों की भर्ती किस प्रकार से होगी इसका निर्णय खंडपीठ करेगी। फुलबेंच ने इस मामले को वापस उसी खंडपीठ के समक्ष भेज दिया है, जहां प्रकरण लंबित था।

वहां विवाद इस बात पर है कि सहायक अध्यापकों की नियुक्ति का आधार टीईटी मेरिट होगी या अभ्यर्थियों का शैक्षणिक गुणांक।
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