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'भाटी को बर्खास्त कर इस्तीफा दें अखिलेश'

Fri, 02 Aug 2013 10:18 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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उत्तर प्रदेश के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या का कहना है कि आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन मामले में सरकार के सच का झूठ उजागर हो गया है।
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उन्होंने मुख्यमंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दर्जा प्राप्त मंत्री नरेंद्र भाटी को बर्खास्त कर खुद इस्तीफा देकर कुर्सी से हट जाना चाहिए।

पत्रकारों से बात करते हुए मौर्या ने कहा कि नोएडा में शासन के सर्वोच्च प्रतिनिधि डीएम की रिपोर्ट से यह बात साफ हो गई है कि आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल का मजिस्द की दीवार गिराए जाने में कोई भूमिका नहीं थी।
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बसपा नेता ने कहा कि दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री नरेंद्र भाटी कहते हैं कि ‘दुर्गा को बहुत समझाया, वह नहीं मानी तो मुलायम सिंह यादव से शिकायत कर उसे 41 मिनट में निलंबित करवा दिया’।

उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि आईएएस को हटवाने में भाटी का हाथ है और भाटी खनन माफियाओं के संरक्षक हैं। इसका मतलब ये भी है कि मस्जिद की दीवार गिराने को निलंबन का कारण बताने वाला मुख्यमंत्री का बयान जनता को गुमराह करने वाला और झूठ है।

उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की आशंका में दुर्गा को हटाने की दलील हास्यास्पद है।

मौर्या ने कहा कि इस सरकार में माफिया, गुंडों, अराजक व अपराधीतत्वों का राज है। सरकार उन पर अंकुश लगाने की जगह खुद ही अराजक हो गई है।

उन्होंने कहा कि सपा की सरकार आने के बाद 130 से ज्यादा छोटे-बड़े और एक दर्जन से ज्यादा बड़े दंगे हुए। तब सरकार ने किसी डीएम, कमिश्नर, एसपी, डीआईजी पर कार्रवाई नहीं की।

अचानक सांपद्रायिक सद्भाव बिगड़ने की आशंका में एक ईमानदार अधिकारी को निलंबित कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दंगे सपा सरकार की साजिश हो रहे हैं। सरकार हिंदू, मुस्लिम को लड़ाकर अपना उल्लू सीधा कराना चाहती है।

इससे सपा और भाजपा को फायदा होता है। सीएम बताएं कि भाटी सही बोल रहे हैं या नोएडा के डीएम, अथवा वे खुद।

मौर्या ने कहा कि इसी तरह इस सरकार ने गोंडा में एक पशु तस्करी में एक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की भूमिका सामने आने के बाद वहां के एसपी को तो हटा दिया लेकिन आरोपी मंत्री का दर्जा बरकरार रखा।
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उन्होंने राज्यपाल व केंद्र सरकार से आईएएस निलंबन मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने राज्यपाल से केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजने की मांग की।
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