सुल्तानपुर। अव्यवस्थाओं के बीच साढ़े चार माह बाद मंगलवार को जूनियर स्तर के विद्यालय छात्र-छात्राओं के भौतिक शिक्षण के लिए खुले। पहला दिन परिषदीय विद्यालयों में अफरा-तफरी के बीच बीता। कई विद्यालयों में बारिश की वजह से जलभराव की स्थिति रही। कई जगह भवन की छतें टपकती रहीं। बरसात के जमा पानी के बीच से छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचना पड़ा। कई विद्यालयों में एमडीएम के लिए चूल्हे तक नहीं जले। पहले दिन स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी नाम मात्र की ही रही। शिक्षक उपस्थिति कम होने की वजह बारिश का होना बता रहे हैं।
मोतिगरपुर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पारसपट्टी के परिसर में जलभराव रहा। यहां पंजीकृत 103 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष मात्र नौ बच्चे उपस्थित हुए। प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुमन पाठक ने बताया कि बच्चों की संख्या बेहद कम है। अभिभावकों से पिछली बार सहमति पत्र लिया था। इस बार अभी नहीं लिया गया है। रसोईया प्रेमशीला, हीरावती व जोहरा में से जोहरा को वैक्सीन नहीं लगी है। परिसर में लगा हैंडपंप कई महीनों से दूषित पानी दे रहा है। जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से परिसर में गंदा पानी भरा हुआ है।
अखंडनगर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय बेलवाई का परिसर बारिश के पानी से लबालब रहा। परिसर में बरसात का पानी जमा होने से घास भी उगी हुई है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक शिवनरायन तिवारी ने बताया कि परिसर, बरामदा आदि में गंदगी व जलभराव की वजह से कक्षाएं आंगनबाड़ी केंद्र में संचालित की जा रही हैं। विद्यालय में नामांकित 182 छात्र-छात्राओं में से मंगलवार सिर्फ आठ बच्चे उपस्थित हुए। बगल में शिव मंदिर होने की वजह से सावन माह में विद्यालय परिसर में श्रद्घालुओं के आवागमन से गंदगी हुई है।
कुड़वार क्षेत्र के जूनियर हाईस्कूल राजापुर में जलभराव की वजह से विद्यालय परिसर तालाब के रूप में परिवर्तित दिखा। यहां अध्ययनरत 154 विद्यार्थियों में से 25 बच्चे मंगलवार को अध्ययन करने विद्यालय पहुंचे। सामने से रास्ते में पानी भरा होने की वजह से बच्चों को पीछे से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ा। प्रधानाध्यापक अशफाक अहमद ने बताया कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बरसात के दिनों में परिसर में पानी जमा हो जाता है। इसकी वजह से आवागमन में दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।