सुल्तानपुर। जिले में बिजली का संकट लगातार गहराता जा रहा है। 270 मेगावाट की मांग की तुलना में अब सिर्फ 175 मेगावाट ही बिजली मिल रही है। आपूर्ति में बड़ी गिरावट आने से बिजली को लेेकर हाहाकार मच गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भीषण कटौती से बेहाल हैं। फिलहाल वितरण मंडल एक-दो दिन में आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर आने की उम्मीद जता रहा है।
इस बार अप्रैल माह में गर्मी ने विकराल रूप धारण कर लिया। अधिकतम तापमान अप्रैल माह में 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वितरण निगम की उम्मीद से ज्यादा तापमान बढ़ने से जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और चरमरा गई है। इंजीनियरों का कहना है कि अप्रैल व मई में अधिकतम तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने की संभावना के हिसाब से वितरण निगम की ओर से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी। गर्मी बढ़ने से एकाएक बिजली की मांग बढ़ गई। इस बीच प्रदेश में कोयला संकट आने से कई बिजली उत्पादन यूनिट बंद हो गई और कुछ पर उत्पादन कम हो गया। गर्मी ज्यादा बढ़ने से बिजली की मांग और आपूर्ति में करीब 100 मेगावाट का अंतर आ गया। इससे जिले की बिजली व्यवस्था डगमगा गई है। मांग के सापेक्ष अप्रैल के अंतिम समय में तकरीबन 175 मेगावाट बिजली मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी कटौती हो रही है। इसका असर तहसील मुख्यालयों के साथ जिला मुख्यालय पर भी दिख रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित 18 घंटे के बजाय आठ घंटे तक ही बिजली मिल पा रही है। तीन शिफ्टों में बिजली मिलने के बाद भी पीक आवर में कटौती चल रही है। करीब आठ से 10 घंटे की कटौती से बिजली को लेकर जिले में हाहाकार मचा है। ग्रामीण क्षेत्रों के सभी सेक्टर बिजली कटौती से प्रभावित हो गए हैं। इसमें विद्यालय, चिकित्सालय, ब्लॉक मुख्यालय व थाना मुख्यालय भी शामिल हैं। लघु उद्योग धंधे बिजली कटौती से प्रभावित हो गए हैं। उनको चालू रखने के लिए उद्यमियों को जेनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है। बिजली की अघोषित कटौती से गेहूं की पिसाई, खेतों की सिंचाई, सरसों की पेराई समेत कई कार्यों पर महंगाई छा गई है। हालांकि एक मई से बिजली आपूर्ति व्यवस्था में कुछ सुधार आ रहा है। इंजीनियरों के मुताबिक मौजूदा समय में बिजली की आपूर्ति करीब 200 मेगावाट तक पहुंच गई है।