सुल्तानपुर। रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग में फंसे जिले के चार छात्र-छात्राओं में से एक दीक्षा अपने घर पहुंच चुकी हैं। यूक्रेन के इवानो शहर से लेकर बुखारेस्ट में हवाई जहाज पकड़ने तक का उनका सफर इतना भयावह था कि वे शायद ही ताउम्र इसे भूल पाएं। वे कहती हैं कि इसे चाहकर भी भूलना आसान नहीं होगा। जिले के कादीपुर मंगरावां निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजमणि वर्मा की पुत्री दीक्षा इवानो के फ्रैंस्विस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में दसवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही हैं।
दीक्षा ने बताया कि जंग शुरू होने के बाद हमलोग अपने हॉस्टल में थे। भारतीय दूतावास ने पहले से एडवाइजरी जारी कर रखी थी कि जो जहां है, वहीं रहे। बॉर्डर की तरफ जाने की कोशिश न करे। एक सुबह करीब चार बजे अचानक भयानक आवाज के बाद नींद खुली। लगातार हो रहे तेज धमाकों से सारे बच्चे सहमे हुए थे। सुबह देखा कि हर ओर तबाही का मंजर है। इवानों हवाई अड्डा नष्ट हो चुका था। बाद में पता चला कि यहां कुल सात मिसाइलें गिरी हैं। उसके बाद बच्चों ने तय कर लिया कि अब हम यहां नहीं रुकेंगे। हम सबने एक टैक्सी की और रोमानिया के लिए निकल पड़े।
हमारी टैक्सी में कुल 25 बच्चे थे। बाकी बच्चे अन्य टैक्सियों में थे। राह आसान दिख रही थी कि रोमानिया बॉर्डर के 10 किलोमीटर पहले ही टैक्सी वालों ने उतार दिया, आगे ले जाने में असमर्थता जताई। वहां से हम सभी पैदल निकले। थके-हारे जब हम बॉर्डर पर पहुंचे तो वहां का मंजर और खौफनाक था। बॉर्डर पर गेट बंद था। भीड़ बहुत ज्यादा थी। पहले निकलने की आपाधापी में तमाम लोग घायल हो गए। हमें भी हल्की चोटें आईं।
बॉर्डर का 25 मीटर का रास्ता पार करने में हमें 12 घंटे लग गए। बॉर्डर पार करने के बाद बस से बुखारेस्ट हवाई अड्डे के लिए रवाना हुए। करीब छह-सात घंटे के सफर के बाद हम बुखारेस्ट में थे। बुखारेस्ट में हमें सात घंटे इंतजार के बाद फ्लाइट मिली। जब हम एयर इंडिया के विमान पर सवार हुए तो जान में जान आई। जब एयर इंडया के विमान ने अपने देश की धरती पर लैंड किया तो मानो पुनर्जीवन मिल गया। यूक्रेन के हालात वाकई बेहद भयावह हैं।