सुल्तानपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में तृतीय श्रेणी कर्मी की नियुक्ति करने का आदेश हवा हवाई ही रह गया है। शासनादेश नहीं आने से जिले में अभी तक एक भी लिपिक की नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में नहीं हो पाई है।
कोरोना संक्रमण की वजह से जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में तकरीबन 21 शिक्षक मौत का शिकार हुए थे। पिछले दिनों बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने बयान जारी कर कहा था कि शिक्षकों की मृत्यु पर उनके परिवारीजनों को या तो शिक्षक या फिर योग्यताधारी होने पर लिपिक की नियुक्ति दी जाएगी।
बेसिक शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद बहुत से मृतक आश्रितों ने लिपिक के पद पर नियुक्ति की इच्छा पाल रखी थी लेकिन मृतक आश्रितों का मंसूबा सफल होता नहीं दिख रहा है। अभी तक इस मामले में शासन या बेसिक शिक्षा विभाग से कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुआ है।
आदेश की प्रतीक्षा में लिपिक की नियुक्ति की चाह रखने वाले कई मृतक आश्रित अपनी नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मी के पद पर नहीं करा रहे हैं। कोविड से 21 मृत शिक्षकों में से मात्र चार को ही नियुक्ति दी जा सकी है। बाकी की पत्रावलियां अभी भी कंपलीट नहीं हुई हैं।
एक को भी नहीं मिली लिपिक की नौकरी
बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में अभी तक चार लोगों को नौकरी दी गई है। इसमें एक शिक्षक और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मी हैं। पटल सहायक सत्यदेव सिंह ने बताया कि शिक्षिका निशा शर्मा की पुत्री पल्लवी शर्मा को सहायक अध्यापक, शिक्षक शैलेंद्र कुमार की पत्नी कृष्ण कुमारी को अनुचर के पद पर नियुक्ति दी गई है। इसके अलावा राम लवट के पुत्र आलोक रंजन और रामचंद्र यादव की पुत्री खुशबू को भी अनुचर के पद पर नियुक्ति दी गई है।
शासन का निर्देश नहीं
मृतक आश्रित के रूप में तृतीय श्रेणी कर्मी के पद का नियुक्ति पत्र देने का अभी तक शासन से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश आएगा तो योग्यताधारी मृतक आश्रितों को लिपिक पद पर नियुक्ति दी जाएगी।
- दीवान सिंह यादव, बीएसए।