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महिलाओं ने निर्जल व्रत रख डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य

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30. सुल्तानपुर गोमती नदी में डूबते सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं। - फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। संतान की लंबी उम्र व परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ बुधवार को महिलाओं ने डाला छठ पर्व पर निर्जल व्रत रख आदि गंगा गोमती में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-पाठ किया। आदि गंगा गोमती स्थित शहर के सीताकुंड घाट पर बनी अलग-अलग वेदी पर सैकड़ों महिलाओं ने सामूहिक रूप से छठ माता की पूजा-अर्चना की। बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद चार दिवसीय डाला छठ पर्व का समापन होगा।
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सूर्य की उपासना का महापर्व डाला छठ को लेकर बुधवार की शाम आदि गंगा गोमती नदी के किनारे स्थित शहर के सीताकुंड घाट पर आस्था व श्रद्घा का सैलाब उमड़ा। 36 घंटों तक निर्जल उपवास के संकल्प के साथ पुत्रों की लंबी उम्र की कामना को लेकर सैकड़ों महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचीं। महिलाओं ने गोमती नदी में कमर तक पानी में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार में सुख समृद्धि के लिए छठ माता से प्रार्थना की। परिवारीजन पूजन सामग्री लेकर महिलाओं के साथ रहे। विद्युत रोशनी से जगमग सीताकुंड घाट देरशाम अनुपम छटा बिखेर रहा था। घाट पर बनाई गई वेदियों (पिंडों) पर समूह में महिलाओं ने विधि-विधान से छठ माता की पूजा अर्चना की। परवैतिन महिलाओं ने छठ माता को गन्ना, फल, फूल व मिष्ठान आदि अर्पित कर पुत्रों की लंबी उम्र की कामना की। कठिन निर्जल व्रत के बावजूद महिलाओं के चेहरों पर श्रद्घा व उत्साह दिखा। कुछ परिवार के पुरुष भी व्रत रखे हुए हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मंगलगान करती महिलाएं देर रात घर पहुंचीं।
दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने सीताकुंड मंदिर व अस्थाई रैन बसेरे में ही रात गुजारी। परवैतिन महिलाएं बृहस्पतिवार की भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य देने पुन: घाट पर पहुंचेगी। रात करीब दो बजे से महिलाओं का घाट पर जमघट शुरू हो जाएगा। अर्घ्य देने व दान-पुण्य के बाद ही महिलाएं जल ग्रहण कर उपवास तोड़ेंगी। स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष राजकुमार सोनी ने बताया कि बृहस्पतिवार की दोपहर तक सीताकुंड घाट पर पूजा-अर्चना का सिलसिला चलेगा।
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ढोल-नगाड़े के संग नाचे बच्चे
शहर के चौक, विवेकनगर, दरियापुर, गभड़िया आदि इलाकों से सीताकुंड घाट के लिए ढोल-नगाड़े के साथ महिलाओं की टोलियां निकलीं। व्रत रखने वाली महिलाओं के परिवार के बच्चे झूमते हुए सीताकुंड घाट तक पहुंचे। यहां पर भी ढोल-नगाड़े की धुन पर बच्चों ने नृत्य किया।
गोमती मित्र मंडल ने निभाया दायित्व
गोमती मित्र मंडल के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सीताकुंड घाट पर अपना कर्तव्य निभाते हुए देखे गए। साफ-सफाई व बुजुर्गों को घाट तक पहुंचाने समिति के पदाधिकारी व सदस्यों ने मदद की। गोमती मित्र मंडल समिति के सदस्य डॉ. दिनकर प्रताप सिंह ने बताया कि उनके दिशा-निर्देशन में लगातार घाट व परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था में लोग जुटे रहे।
सेल्फी की रही धूम
- डाला छठ पर्व के तीसरे दिन सीताकुंड घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ लोग सेल्फी लेते हुए देखे गए। युवक-युवतियों के साथ ही महिलाओं में भी सेल्फी का उत्साह देखा गया। नाव में बैठकर महिलाओं ने नौका विहार करते हुए मोबाइल से सेल्फी ली।
डाला छठ पर्व को लेकर युवाओं में उत्साह
डाला छठ पर्व को लेकर स्वर्णकार समाज के युवाओं में उत्साह है। सोनी समाज के युवा चार दिवसीय डाला छठ के पर्व में परिवार के साथ पूजा-पाठ में भरपूर सहयोग करते हैं। विशाल सोनी कहते हैं कि डाला छठ पर्व में वे कहीं घूमने नहीं जाते हैं। पूजा-पाठ के कार्यक्रम में परिवार का सहयोग करते हैं। किशन सोनी ने बताया कि उनकी माता छठ पर्व का व्रत रखती हैं। घर से लेकर सीताकुंड घाट तक पूजा-पाठ में परिवार के साथ शामिल रहते हैं।
अनुज सोनी कहते हैं कि चार दिवसीय डाला छठ का पर्व बहुत अच्छा लगता है। परिवार के सभी लोग एक साथ मिलकर पूजा-पाठ में शामिल होते हैं। पीयूष सोनी ने कहा कि उनकी माता पिछले कई सालों से छठ व्रत का पालन कर रही हैं। समय के साथ इस पर्व में स्वर्णकार समाज के अलावा अन्य लोग भी शामिल हो रहे हैं।
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