सुल्तानपुर। बदलता मौसम बच्चों के साथ बड़ों को भी बीमारी की चपेट में ले रहा है। बड़ी संख्या में लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खचाखच भरे हैं। ‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को जिला अस्पताल का जायजा लिया तो मरीज व उनके तीमारदार बेहाल नजर आए।
गर्म मौसम से लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग रोजाना पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित होकर जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में ज्यादा संख्या बच्चों की है। जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खचाखच भरे हुए हैं। कुड़वार कस्बा निवासी रामचंद्र ने अपने ढाई वर्षीय पुत्र लकी को तेज बुखार होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दवाएं मिल रही हैं लेकिन गर्मी से बच्चा बेहाल है। बिजली जाने के बाद अस्पताल में पंखा नहीं चलता है। कोतवाली नगर क्षेत्र के विवेक नगर के संतोष कुमार ने अपनी तीन वर्षीय पुत्री प्रियंका को बुखार होने पर भर्ती कराया है। जबकि लंभुआ थाना क्षेत्र के बेदूपारा निवासी विजय का पांच वर्षीय पुत्र प्रेम के पेट में मरोड़ उठी तो उसे चिकित्सक को दिखाया। चिकित्सक ने वायरल फीवर की बात बताई। बेटे को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। विजय ने बताया कि जिला अस्पताल सिर्फ कहने को है, यहां सुविधा के नाम पर मरीजों को छला जाता है। बिजली जाने के बाद कभी भी जेनरेटर या फिर इनवर्टर से बिजली की सप्लाई नहीं दी जाती है। गोसाईगंज थाना क्षेत्र के सैफुल्लागंज निवासी सिराज की पुत्री रुखसाना (8), धम्मौर थाना क्षेत्र के बनकेपुर निवासी राम दुलार का तीन वर्षीय पुत्र रवि, कुड़वार थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी मोहम्मद जावेद का दो वर्षीय पुत्र अली भी पेट दर्द और उल्टी से पीड़ित है।
इनसेट
चिकित्सक सतर्क : सीएमएस
सुल्तानपुर। सीएमएस डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में जेनरेटर की व्यवस्था है। बिजली जाने के बाद जेनरेटर चलाया जाता है। यदि कुछ खराबी होती है तभी जेनरेटर बंद होता है। उन्होंने बताया कि कुछ पंखा खराब है। उसे ठीक करने के लिए कहा गया है।
इनसेट
बचाव ही बेहतर उपाय : डॉ. सुधाकर सिंह
सुल्तानपुर। डॉ. सुधाकर सिंह बताते हैं कि गर्मी के सीजन में बचाव ही बेहतर उपाय है। गर्मी में सिर पर गमछा या फिर टोपी पहनकर बाहर निकलें। नींबू पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं। मोटा कपड़ा पहनें, जिससे हाथ पूरी तरह से ढका हो। बच्चों के लिए भी इन बातों का ध्यान रखें। वायरल फीवर होने पर मरीज को तत्काल चिकित्सक को दिखाएं।