सशस्त्र सीमा बल के जवान का सिर कटा शव जब उसके घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बोडो उग्रवादियों ने असम में जवान की हत्या कर दी थी।
अपने लाल का शव देखकर जहां परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल था वहीं ग्रामीणों की भी जवान की शहादत से आंखें नम थीं।
असम में अगवा किए गए सशस्त्र सीमा बल के जवान अनिल यादव और नूसल चंद्र मेहंदी की बोडो उग्रवादियों ने हत्या कर दी थी। उग्रवादी अनिल यादव का सिर काटकर ले गए और धड़ जमीन में गाड़ गए।
शनिवार को जब अनिल का शव जब पैतृक गांव नगला मोहन पहुंचा तो इस अमानवीय घटना का खुलासा हुआ।
शव की हालत देख ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने के लिए अलीगंज एटा मार्ग पर जाम लगा दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव ने ग्रामीणों को किसी तरह से समझा बुझाकर जाम खुलवाया। कासगंज में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद अनिल यादव के परिवारीजनों को बीस लाख रुपये की आर्थिक मदद करने की घोषणा की।
कांस्टेबल अनिल यादव (32) की पोस्टिंग असम के बघई में 54वीं बटालियन थी। गत छह दिसंबर को वह अपने पांच साथियों के साथ बार्डर आपरेशन पोस्ट पर गए थे।
वहां से लौटते समय अनिल और असम निवासी नूसल चंद्र मेहंदी का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था।
सड़ चुके था जवान का शव
इनके तीन साथी बटालियन मुख्यालय पहुंच गए थे। तभी से इनकी तलाश की जा रही थी। दो दिन पहले इनके शव हक वा नदी किनारे गड़े मिले। दोनों शव सड़ गल चुके थे।
मेहंदी का शव किस हाल में था, इसकी जानकारी शव के साथ आए सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी नहीं दे पा रहे थे।
मुख्यमंत्री को बुलाने की मांग
जाम के दौरान ग्रामीण पड़ोस के जिले कासगंज में लैपटॉप बांटने आए मुख्य अखिलेश यादव को गांव में बुलाने के जिद पर अड़े थे और उनका कहना था कि मुख्यमंत्री के आने के बाद ही वह शव की अंत्येष्टि करेंगे।
सूचना पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव भी ग्रामीणों के बीच पहुंच गए। जिला पंचायत अध्यक्ष ने समझाया और विधायक अलीगंज रामेश्वर यादव से फोन पर बात कराई।
दोनों ने ग्रामीणों को भरोसा दिया है कि सीएम जल्द ही यहां आएंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। दोपहर बाद सशस्त्र सलामी के बाद हजारों नम आंखों से शहीद अनिल यादव को अंतिम विदाई दी गई।
अंत्येष्टि के समय जिलाधिकारी जेपी त्रिवेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय मोहन शर्मा, एसएसबी की चौथी बटालियन लखनऊ के कमांडेंट प्रखर त्रिवेदी व अन्य अधिकारी मौजूद थे।
अनिल को खोने का गम, तो शहादत पर गर्व भी
अपने के खोने का गम, तो वहीं देश की खातिर शहीद होने पर गर्व। जिधर नजर घुमाओ भीड़ ही भीड़, लेकिन आंखें नम। यह माहौल था थाना जैथरा के गांव नगला मोहन का।
शनिवार की सुबह जब असम में शहीद हुए एसएसबी के जवान अनिल यादव का शव गांव पहुंचा तो यही मंजर नजर आया।
असोम में गत छह दिसंबर को बीओपी बार्डर से लौटते समय अगवा हुए एटा के लाल अनिल यादव का शव दो दिन पहले हकवा नदी के किनारे जमीन में दबा हुआ मिला था।
घटना की सूचना पर परिवारीजन असम रवाना हो गए थे। शनिवार की सुबह जब उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो शोक की लहर सी दौड़ गई। शहीद हुए जवान के शव को तिरंगे में लपेटकर एसएसबी की टुकड़ी लेकर आई।
शव कई दिन पुराना होने और उग्रवादियों द्वारा सिर काट लेने व तेजाब डाल देने से बदबू भी आ रही थी। घरवालों का रो-रोककर बुरा हाल था। बाद में घर के पास ही खेत में अंतिम विदाई दी गई।
मुखाग्नि छोटे भाई ने दी, जबकि अंतिम सलामी पुलिस व एसएसबी के जवानों ने दी। हवा में फायर किए। इस मौके पर हजारों ग्रामीण मौजूद थे।