केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा एक बार फिर समाजवादी पार्टी के खिलाफ बोले। इस बार उन्होंने कहा कि
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने का बाद ही प्रदेश सरकार गिर जाएगी।
हालांकि उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि यह किन हालातों में और कैसे होगा? उन्होंने यह भी घोषणा की कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें बढ़ने जा रही हैं और इस बार कांग्रेस को 45 सीटें मिलेंगी।
वहीं समाजवादी पार्टी इस चुनाव में केवल चार सीटों पर सिमट जाएगी। बहुजन समाज पार्टी को 26 और भारतीय जनता पार्टी को केवल पांच सीटें मिलेंगी।
उत्तरप्रदेश में गोमतीनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय इस्पात मंत्री ने बगैर नाम लिए फिर मुलायम पर हमला बोला।
उन्होंने कहा कि अक्टूबर, 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हिन्दू-मुसलमानों को लड़ाने में जुटे थे। पहले उन्होंने अयोध्या में शिलान्यास करने दिया।
जब भीड़ जुट गई तो उनकी योजना मिलकर बाबरी मस्जिद का ढांचा तोड़ने की थी। अगर तत्कालीन एसपी ने फायर का आदेश न दिया होता तो दो लोग तो बेलचा और हथौड़ा लेकर गुम्बद तोड़ने पहुंच ही गए थे।
एसपी के आदेश के बाद वह दोनों नीचे आ गिरे। यह होने के बाद जब मुसलमान खुश हो गए तो उन्होंने नवंबर में 14 हिन्दुओं को मरवा दिया।
इनमें से कोलकाता से आए कोठारी बंधु तो केवल हनुमान गढ़ी में दर्शन करने आए थे, उन्हें भी मार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री हिन्दु-मुसलमानों की भावनाओं को भड़का रहे थे।
रामजन्म भूमि थाना खुलवाया था सीएम ने
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या में पहले केवल एक कोतवाली थी। विवादित परिसर की सुरक्षा के लिए केवल एक चौकी थी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आडवाणी से मिलने के बाद विवादित परिसर में रामजन्म भूमि थाना खुलवा दिया। जबकि रिकार्ड में कहीं पर भी रामजन्म भूमि दर्ज नहीं है।
मोदी और आडवाणी दोनों अपराधी
बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि राजग के लोग मोदी और आडवाणी के लिए लड़ रहे हैं कि कौन अच्छा और कौन खराब है? देश के सेकुलर कैरेक्टर के लिए दोनों ही खराब हैं।
दोनों ही साम्प्रदायिक हैं और दोनों सेकुलर कैरेक्टर को तोड़ने के अपराधी हैं। ऐसे में दोनों ही देश के लिए घातक हैं।
जवाहर लाल और आडवाणी की कोई तुलना नहीं
उन्होंने बगैर नाम लिए मुलायम सिंह यादव पर आरोप लगाया कि वे आडवाणी की तुलना जवाहर लाल नेहरू से करते हैं। दोनों में कोई तुलना हो ही नहीं सकती।
एक आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री और सेकुलरिज्म को मानने वाला और सेकुलरिज्म का दुश्मन। ऐसी तुलना करना ही हास्यास्पद है।