प्रदेश में चरमराई बिजली व्यवस्था के बीच ऊर्जा मंत्री के बयान पर बुधवार को वर्कर्स फ्रंट ने कड़ी आपत्ति जताई है। बिजली संकट के लिए प्रबंधन और बिजली कर्मियों को प्रमुख वजह बताने पर भड़के वर्कर्स फ्रंट ने इसे सरकार की विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास करार दिया। कहा कि ऊर्जा मंत्री का यह बयान समस्याओं से लड़ने का नहीं बल्कि समस्या आने पर पल्ला झाड़ने वाला है।
वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा कि बिजली महकमे के शीर्ष प्रबंधन में शासन के प्रतिनिधि हैं। ऐसे में शीर्ष प्रबंधन सीधे तौर पर ऊर्जा मंत्री व उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशन में काम करता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा बिजली संकट की तात्कालिक वजह प्रदेश व केंद्र सरकार के स्तर पर संकट का आकलन करने और उससे निपटने की कार्ययोजना तैयार करने की विफलता है। केंद्रीय मंत्रियों पर हुई कार्रवाई अगर पहले हुई होती तो परियोजनाओं में रेल रैक की कमी नहीं होती। शासन की ओर से शीर्ष प्रबंधन के कामकाज की मॉनीटरिंग नहीं की गई जो ऊर्जा मंत्री के वक्तव्य से भी साफ है। इसके अलावा रूटीन रखरखाव आदि के लिए समुचित बजट भी मुहैया नहीं कराया गया। बजट की कमी व भारी घाटे की वजह बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहरा रही है। सार्वजनिक इकाइयों से बेहद सस्ते दामों पर बिजली उत्पादन हो रहा है लेकिन सरकार ने कारपोरेट कंपनियों से उच्च दरों पर बिजली खरीद का करार किया है।