मकरा गांव के पास रविवार को हुए हादसे की खबर सुन हर कोई अवाक रह गया। दिन भर लोग उसी रास्ते से गुजरते रहे, सामने राखड़ लदा दुर्घटनाग्रस्त हाइवा भी दिखा, लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि उसके नीचे चार लोग दबे होंगे। पुलिस भी कार ढूंढने में लगी रही, मगर इससे बेखबर रही।
रेणुकूट से अनपरा के बीच का टू लेन रास्ता तेज घुमावदार और घने जंगल वाला है। मार्ग पर कई जगह मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है, ऐसे में किसी घटना की दशा में लोग सूचना भी नहीं दे पाते। इसी मार्ग पर रविवार की सुबह राखड़ लदा हाइवा पलट गया। पूरी राख सड़क पर बिखर गई थी। आल्टो कार उसके राख के नीचे इस तरह दबी कि किसी की नजर ही नहीं पड़ी। बताते हैं कि कार सवार लड़की देखने बनारस जा रहे थे।
सिंगरौली में चार लोग कार में सवार हुए थे। रेणुकूट में एक रिश्तेदार को लेना था। अनपरा से निकलने के पहले उन्होंने फोन कर बताया था कि वह एक घण्टे में पहुंच जाएंगे। काफी देर बीतने के बाद भी जब वह नहीं पहुंचे तो रेणुकूट में इंतजार कर रही महिला ने उन्हें फोन लगाना शुरू किया। लगातार प्रयास के बाद भी कोई सम्पर्क न होने पर सुबह करीब आठ बजे महिला ने रेणुकूट पुलिस को कार सवारों के लापता होने की सूचना दी।
इसके बाद पुलिस उनके बारे में पता लगाने में जुटी। पीपरी से शक्तिनगर तक सभी सम्भावित स्थलों को खंगाला गया, लेकिन कहीं कोई जानकारी नहीं मिली। देर शाम रास्ते से दुर्घटना ग्रस्त वाहन को हटाने के दौरान नजर पड़ी तो लोग सन्न रह गए। मौके पर दुद्धी सीओ प्रदीप सिंह चंदेल सहित अनपरा और पीपरी थाने की फ़ोर्स पहुंच गई। देर रात शवों को बाहर निकाला गया।
पांच घंटे तक बाधित रहा आवागमन
दुर्घटनाग्रस्त वाहन को हटाने के लिए जेसीबी और क्रेन की मदद लेनी पड़ी। इसके चलते मुख्य मार्ग पर आवागमन थम गया। शाम 6 बजे से देर रात तक हाइवे पर आवागमन बाधित रहा। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। जाम में वाहनों के फंसने से राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी।