वनवासी सेवा आश्रम के प्रांगण में आश्रम के अध्यक्ष और साहित्यकार अजय शेखर ने शिक्षा निकेतन गोविंदपुर के छात्रों से संवाद किया। उन्हें गांधी जी के विचार सत्य, अहिंसा, सदाचार, नैतिकता को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। कहा कि आज सिर्फ गांधी विचार से ही गांवों और जंगलों को विनाश से बचाया जा सकता है। भारत की पुरातन सांस्कृतिक ज्ञान और त्याग की जीवनशैली की विरासत को पुन: समाज में स्थापित सिर्फ गांधी जी के दिखाए मार्ग से ही संभव होगा।
उन्होंने कहा कि आज का समाज विघटनकारी है। हमारे गांव और जंगल उजड़ रहे हैं। सोनभद्र के अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि यहां के घने जंगलों के लाह, चिरौंजी जैसे तमाम वन उत्पाद पूरे देश में प्रसिद्ध थे। आज बड़ी कंपनियों की वजह से यह सब नष्ट हो गए। जंगलों में बहुत से औषधि गुण वाली जड़ी बूटियां भी समाप्त हो गई। आज की शिक्षा त्याग और ज्ञानी लोगों को हीनता में डाल कर सिर्फ लालची और धनी की श्रेष्ठता सिद्ध करने लगी है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि गांधी विचारों पर चलें। अपने गांव और जंगल को बचाएं। इस मौके पर विमल भाई, देवनाथ सिंह, इंदुबाला सिंह, प्रमोद, दिवाकर शर्मा, रामनारायण भाई आदि रहे।