सोन नदी किनारे बैजनाथ में 3600 मेगावाट, सोमा में 2400 मेगावाट, ससनई में 1750 मेगावाट, चेरूई में 1680 मेगावाट, चिचलिक में 1560 मेगावाट, झरिया में 1620 मेगावाट, पनौरा में 1500 मेगावाट, झारखंड से सटे बसुहारी में 1200 मेगावाट का पंप स्टोरेज पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। बरसात के समय सोन नदी में बारिश और बाढ़ के आने वाले पानी को पंप के जरिए तीन स्टेज वाले बांध में इकट्ठा किया जाएगा।
बांध में इकट्ठा पानी के जरिये टरबाइन चलाकर जरूरत के अनुसार बिजली पैदा की जाएगी। इसके अलावा, एनटीपीसी की तरफ से ओबरा डी, अनपरा ई और शक्तिनगर में 1600-1600 मेगावाट के नए पावर प्लांट की स्थापना की जाएगी। सोन नदी के किनारे जिन जगहों पर पावर प्लांट स्थापित होने हैं, वह क्षेत्र औद्योगिक विकास से अछूता है। पावर प्लांट लगने के बाद यहां विकास के साथ साथ रोजगार भी उपलब्ध होगा।
यूपी में अधिकतम बिजली खपत पिछले दिनों (गर्मी के मौसम में) 31486 मेगावाट थी। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का दावा था, यह आंकड़ा पूरे देश में सर्वाधिक है। कहा था, पहले एक दिन में सबसे ज्यादा बिजली आपूर्ति-खपत का रिकॉर्ड महाराष्ट्र के नाम था। अब यह रिकार्ड यूपी के नाम हो गया है। इसे लेकर सोनभद्र में 11 पावर प्लांट लगाने की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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अधिकारी बोले
शासन का जिले में ज्यादा से ज्यादा औद्योगिक विकास पर जोर है। जिले में 11 नए पावर प्लांट की स्थापना होनी है। निर्माण जल्द शुरू हो सके, इसके लिए डीएम के निर्देश पर औपचारिकताएं पूरी करने की कवायद चल रही है।
-विनोद कुमार चौधरी, उपायुक्त उद्योग