चंदौली के नौगढ़ तहसील का बड़ा हिस्सा सोनभद्र से लगता है। नौगढ़ और उससे सटे सोनभद्र के राॅबर्ट्सगंज, चतरा, नगवां और करमा ब्लॉक का सामाजिक परिदृश्य लगभग एक जैसा ही है। गरीबी, बदहाली, पिछड़ापन, जनसुविधाओं का अभाव इन ब्लॉकों में है, ठीक वैसी ही परिस्थितियों में नौगढ़ के जंगल-पहाड़ों के बीच भी लोग जीवन-यापन कर रहे हैं।
एक जैसे सामाजिक परिवेश के बावजूद महज चंद किमी के अंतर से उनके जाति प्रमाण पत्र का स्वरूप बदल जाता है और इसके साथ उनकी योग्यता भी बदल जाती है। सरकारी नौकरियों में भी खरवार जाति के दो तरह के आरक्षण के चलते कई विवाद सामने आ चुके हैं।
खरवार महासभा के पदाधिकारी रामचंद्र खरवार का कहना है कि चंदौली और सोनभद्र के परिवेश में ज्यादा अंतर नहीं है। समय-समय पर समान आरक्षण की मांग उठती रही है, लेकिन मामला राजनीतिक नफा-नुकसान का होने के कारण कोई भी दल इस पर खुलकर बोलना नहीं चाहता।
वर्ष 2014 में सांसद बने थे छोटेलाल खरवार
मोदी लहर के बीच वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में रॉबर्ट्सगंज सीट से भाजपा प्रत्याशी छोटेलाल खरवार को प्रचंड जीत मिली थी। छोटेलाल यह चुनाव इसलिए लड़ पाए कि वह मूल रूप से चंदौली के नौगढ़ के रहने वाले हैं। इस बार चुनाव में भी भाजपा और सपा गठबंधन सहित अन्य दलों से कई खरवार नेता दावेदारी कर रहे हैं। उधर, दुद्धी विधानसभा के उपचुनाव में भी कई खरवार दावेदार हैं। यह सीट जनजाति के लिए आरक्षित है।
खरवार जाति को पांच जिलों में जनजाति का दर्जा
खरवार जाति को प्रदेश के पांच जिलों में जनजाति का दर्जा हासिल है। इसमें सोनभद्र के अलावा वाराणसी, गाजीपुर, बलिया और देवरिया शामिल है। चंदौली जिले का सृजन भी वाराणसी से ही हुआ है, लेकिन वहां उन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है।