सातवें चरण के लिए नामांकन में अब सिर्फ 48 घंटे शेष हैं मगर जिले की कई सीटों पर टिकट का रहस्य अब तक नहीं सुलझ सका है। दुद्धी और राबर्ट्सगंज सीट पर भाजपा-अद एस ने कोई प्रत्याशी तय नहीं किया है तो दुद्धी और ओबरा सीट को लेकर बसपा में ऊहापोह जारी है। सपा और अपना दल-कमेरावादी के बीच घोरावल सीट को लेकर खींचतान चरम पर है। दोनों ही दलों की ओर से इस सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने के एलान से कार्यकर्ता असमंजस में हैं। इन सीटों पर विपक्षी दलों की ओर से जहां प्रचार तेज कर दिया गया है तो इन दलों में अभी प्रत्याशी ही तय न होने से सभी सुस्त पड़े हैं।
जिले में मतदान सात मार्च को होना है। दस फरवरी से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया में अब तक सिर्फ घोरावल सीट से भाजपा और बसपा के उम्मीदवार समेत पांच ने पर्चा भरा है। अन्य तीन सीटों पर अब तक नामांकन का खाता नहीं खुला है। राबर्ट्सगंज और दुद्धी में तो भाजपा प्रत्याशी ही तय नहीं कर पाई है। इन दोनों सीटों के लिए भाजपा और सहयोगी अपना दल-एस में खींचतान मची हुई है। अपना दल-एस जिले की दोनों सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारना चाह रहा है जबकि भाजपा नेतृत्व सिर्फ एक सीट देने को तैयार है। यह सीट कौन सी होगी इस पर भी सहमति नहीं बन पाई है। नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आनेे के बाद दोनों ही दलों में टिकट के दावेदारों की चिंता बढ़ती जा रही है। कमोबेश ऐसा ही हाल दुद्धी और ओबरा सीट को लेकर बसपा में है। दुद्धी के विधायक हरिराम चेरो को अपने पाले में लाकर बसपा ने दुद्धी की तस्वीर भले ही कुछ हद तक साफ कर दी हो लेकिन ओबरा में अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है। घोरावल सीट को अपने पाले में बताते हुए अपना दल कमेरावादी ने सुुरजीत सिंह पटेल को उम्मीदवार घोषित कर दिया है तो दूसरी ओर सपा नेता इस सीट पर अपने दल का प्रत्याशी होने के दावे के साथ नामांकन की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में गठबंधन से जुड़े कार्यकर्ता असमंजस में हैं। वह यह नहीं समझ पा रहे कि उन्हें किसके पक्ष में प्रचार करना है। सपा का स्थानीय नेतृत्व इस बारे में मुंह नहीं खोल रहा तो अपना दल कमेरावादी के नेता भी राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर निगाह लगाए हुए है।