फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार खेलों का था ट्रायल, तीन में नहीं आया कोई भी खिलाड़ी

विज्ञापन
विज्ञापन
खेल विभाग से संचालित विभिन्न छात्रावासों में चयन के लिए शनिवार को आयोजित ट्रायल में सिर्फ चार बालिकाएं ही पहुंच सकीं। वो भी तीरंदाजी के लिए। टेबल टेनिस और बास्केटबाल के लिए कोई खिलाड़ी नहीं पहुंची। बालक वर्ग की कबड्डी के ट्रायल में भी सन्नाटा छाया रहा। खेल विभाग के अफसर दोपहर तक खिलाड़ियों का इंतजार करते रहे, मगर तीन श्रेणियों में एक भी खिलाड़ी के न पहुंचने पर इसकी रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय को भेज दी गई।
विज्ञापन

कोरोना काल में बंद हुए खेल छात्रावासों और प्रशिक्षण कैंपों का फिर से संचालन शुरू होने लगा है। इसके लिए विभिन्न आयु वर्ग के खिलाड़ियों का चयन जिला व मंडल स्तर पर होने वाले ट्रायल के माध्यम से किया जाएगा। अंडर-15 आयु वर्ग में लड़कियों की तीरंदाजी, बास्केटबाल और टेबल टेनिस स्पर्धा के लिए शनिवार को जिला स्तर पर ट्रायल आयोजित था। इसी के साथ लड़कों के लिए इसी वर्ग में कबड्डी का भी ट्रायल होना था। सुबह नौ बजे से ही खिलाड़ियों को ट्रायल में शामिल होने के लिए तियरा स्थित विशिष्ट स्पोर्ट्स स्टेडियम में आने के लिए कहा गया था। अधिक से अधिक खिलाड़ी ट्रायल में शामिल हों, इसके लिए डीआईओएस और बीएसए के माध्यम से सभी स्कूलों में सूचना भी भेजी गई थी। ट्रायल लेने के लिए कोच और खेल अधिकारी तो तय समय से पहुंच गए लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी खिलाड़ी नहीं पहुंचे। दोपहर में तीरंदाजी के ट्रायल के लिए चार खिलाड़ी स्टेडियम पहुंचे। अन्य तीन खेलों में दोपहर बाद भी किसी के न पहुंचने पर चयनकर्ता लौट गए। इस बाबत जिला क्रीड़ा अधिकारी डीपी सिंह ने बताया कि चयन ट्रायल पूर्व निर्धारित था। इसमें 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल होना था। स्कूलों में सूचना प्रेषित कराने के बावजूद तीन खेलों में एक भी खिलाड़ी ट्रायल देने नहीं पहुंचे। तीरंदाजी में चार लड़कियों ने हिस्सा लिया। ट्रायल के बाद उनकी रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी गई है। अब 11 जुलाई को मंडलीय ट्रायल होगा।
कागजातों पूरा करने में आ रही दिक्कत
ऐसा नहीं कि जिले में खिलाड़ियों की कमी है या फिर बच्चे खेलों में आगे बढ़ना नहीं चाहता। खिलाड़ियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद विभाग की कागजी औपचारिकताओं की जटिलता उनकी परेशानी बढ़ा रही है। इस बार ट्रायल में शामिल होने के लिए खिलाड़ियों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य किया गया है। यह प्रमाण पत्र सरकारी अस्पताल से ही बनाया जाना है। डॉक्टरों की कमी से जूझते अस्पतालों में खिलाड़ियों को चक्कर काटना पड़ रहा है। कागजी कोरमपूर्ति के लिए यहां-वहां की भागदौड़ से उन्हें दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें