सोनभद्र। प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले जिले में राजस्व अधिकारियों की भारी कमी है। सभी तहसीलों में नायब तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल के पद रिक्त पड़े हैं। इससे न सिर्फ राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा भी बाधित है। भूमि विवाद को लेकर उभ्भा कांड होने के बाद भी राजस्व कर्मचारियों की तैनाती में सुस्ती बनी हुई है। चार साल पहले आकांक्षी जिलों के लिए तय मानकों के तहत भी यहां सभी रिक्त पद भरे जाने थे, लेकिन राजस्व विभाग के पदों पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार ने देश के 112 जिलों को पांच मानकों पर अति पिछड़ा जिला घोषित किया है। इसमें स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास, ढांचागत सुविधाएं आदि शामिल हैं। इन 112 जिलों में सोनभद्र समेत यूपी के आठ जिले हैं। वर्ष 2018 में शासन ने तय किया था कि इन जिलों का पिछड़ापन दूर करने के लिए धन और संसाधन की कमी नहीं होने दी जाएगी। सभी विभागों में रिक्त पदों पर तैनाती की नीति तैयार हुई थी। चार वर्ष बाद भी राजस्व विभाग में प्रमुख पदों पर ही पूर्ति नहीं हो पाई है। सदर तहसील क्षेत्र में नायब तहसीलदार के दो पद हैं, लेकिन एक एक अरसे से खाली हैं। इसी तरह कानूनगो के भी नौ पद भी रिक्त है। तहसील में 11 कानूनगो के सापेक्ष दो की ही वर्तमान में तैनाती हैं। जिनसे काम लिया जा रहा है। यही हाल ओबरा, घोरावल और दुद्धी तहसील की भी है। इस संबंध में सदर तहसीलदार बृजेश वर्मा का कहना है कि एक कानूनगो शहरी क्षेत्र के साथ ही कार्यालय का काम संभाल रहे हैं, जबकि दूसरे कानूनगो सर्किल (फिल्ड) का कामकाज देख रहे हैं। नौ पद रिक्त होने से काम लेने में दिक्कत हो रही है। लंबे समय से रिक्त पद होने के चलते राजस्व संबंधित विवादों का निपटारा नहीं हो पा रहा है।
दुद्धी व घोरावल में लंबे समय से नायब तहसीलदार नहीं
प्रदेश की आखिरी विधानसभा क्षेत्र वाली दुद्धी और घोरावल तहसील में लंबे समय से नायब तहसीलदार के पद रिक्त हैं। दोनों तहसील में नायब तहसीलदार के दो-दो पद सृजित हैं। इसके अलावा दुद्धी में कानूनगो के आठ पद हैं। इसमें सिर्फ एक ही कानूनगो की तैनाती है। इससे यहां सरकारी काम किस रफ्तार से हो रहा है, इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं घोरावल तहसील में कानूनगो के नौ पद के सापेक्ष दो कानूनगो ही तैनात हैं। इसमें एक कानूनगो सर्किल क्षेत्र और दूसरे कार्यालय का कामकाज देख रहे हैं। नवसृजित ओबरा तहसील में भी राजस्व अधिकारियों की कमी है।
नगवां ब्लॉक के पवनी गांव निवासी अशोक कुमार शुक्ल का पक्की पैमाइश का आदेश हुए छह माह से अधिक हो गया। कुछ गाटा की नापी हुई है, लेकिन अभी तक कई नंबर की नापी नहीं हो सकी है। जिस खेत का नापी हो गया है, वहां पत्थरगड़ी की कार्रवाई में देर हो रही है।
राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बुड़हर गांव में जमीन खरीदने के बाद कई काश्तकार अभी तक कब्जा नहीं ले सके हैं। अधिकारियों की कमी की वजह से एक महिला काश्तकार का उपजिलाधिकारी न्यायालय के आदेश के डेढ़ वर्ष बाद भी जमीन नापी नहीं हो सका है। इससे महिला काश्तकार परेशान हैं।
नायब तहसीलदार व कानूनगो सहित अन्य पद रिक्त होने से काम प्रभावित हो रहा है। शासन स्तर से रिक्त पदों पर नियुक्ति होती है। इसके लिए नियमित पत्राचार किया जाता है। कुछ पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। - राकेश सिंह, अपर जिलाधिकारी सोनभद्र।
जिले को मिले चार नायब तहसीदार
दो दिन पहले शासन स्तर से जिले में चार नायब तहसीलदार की नियुक्ति की गई है। इनके पदभार संभालने से कुछ राजस्व के मामलों में कमी आएगी। प्रयागराज के रहने वाले उज्जवल गुप्ता और प्रयागराज के कोरांव क्षेत्र के रहने वाले अव्यक्त राम तिवारी, रोहतास बिहार के रहने वाले राघवेंद्र प्रताप सिंह और अहिरौला आमगढ़ के रहने वाले रजनीश यादव को सोनभद्र में नायब पद पर तैनाती की गई है।