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कोरोना काल के बाद सुधरा अस्पताल का हाल

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अनपरा। संसाधनों की कमी से जूझते अस्पतालों को कोरोना काल ने संजीवनी दी है। नए ऑक्सीजन प्लांट लगाए तो कई अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। नए उपकरण लगने से अस्पतालों की स्थिति में सुधार हुआ है। डिबुलगंज अस्पताल ऑक्सीजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बना है। यहां 45 एलपीएम की क्षमता का प्लांट लगा है। बेड की कमी दूर हुई। ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया। कई अन्य उपकरण भी मिले हैं। इससे अस्पताल के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी काफी सहूलियत हुई।
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अस्पताल में बच्चों के डॉक्टरों की भी तैनाती की गई है। हालांकि अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से अब भी लोगों को इसकी जांच के लिए परेशान होना पड़ रहा है। दवाओं को मंगाने की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद शेष दवाएं तो अस्पताल में हैं लेकिन एंटी रैबीज इंजेक्शन का अभाव है। कुत्ता काटने के मामले आने पर मरीजों को म्योरपुर सीएचसी भेजा जाता है या तो बाहर से मंहगे दामों में दवा खरीद कर लगवाना पड़ता है। डॉ. बीके सिंह ने बताया कि कोरोना से लड़ने में सहायक सभी मशीनों और किट अस्पताल में मुहैया कराई गई। इसमें आरटीपीसीआर, एंटीजन टेस्ट, एल-1 आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन प्लांट, बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती जैसी तमाम सुविधाएं दी गई हैं। लेकिन कुत्ते के काटने पर लगने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन अब तक अस्पताल में मौजूद नहीं है। गर्मी के साथ ही कुत्तों के काटने के मरीजों के केस बढ़े हैं।
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