फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोरावल में जातीय गोलबंदी तोड़ने में नाकाम रही सपा

विज्ञापन
विज्ञापन
घोरावल विधानसभा सीट पर अनिल मौर्य लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। इससे पहले वह राजगढ़ से भी दो बार जीते थे। तब घोरावल का इलाका राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र का ही हिस्सा होता था। अनिल मौर्य की जीत में जातीय समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। सपा की कोशिश थी कि वह विधायक से नाराजगी को भुनाते हुए जातीय गोलबंदी तोड़ने में कामयाब रही लेकिन अंतिम समय में उसे मुंह की खानी पड़ी।
विज्ञापन

घोरावल में सबसे ज्यादा मतदाता कुशवाहा जाति के हैं। पहले बसपा और फिर भाजपा के परंपरागत वोटरों के साथ मिलने से वह हमेशा मजबूत स्थिति में रहे। अपना दल-एस के भाजपा में जुड़ने से कुर्मी मतदाता भी भाजपा के साथ जुड़ गए थे। हालांकि पिछले पांच वर्ष के दौरान इलाके में विधायक की लोकप्रियता में कमी आई थी। अलग-अलग कारणों से विभिन्न वर्गों के लोग नाराज थे। बसपा ने जब मोहन कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया तो यह अनुमान लगाया जाने लगा था कि अनिल मौर्य के मजबूत स्वजातीय वोटों में बड़ी सेंध लगेगी। उधर, सपा ने रमेश दुबे को उतारकर ब्राह्मण कार्ड खेला। जातिगत आधार पर ब्राह्मण मतदाता क्षेत्र में दूसरे नंबर पर हैं। ब्राह्मण, यादव, मुस्लिम और विधायक से नाराज अन्य वर्गों को मिलाकर वह जीत का खाका खींचने में लगे थे। स्थानीय और बाहरी का नारा देते हुए उन्होंने मौर्य-कुशवाहा वोटरों को बसपा प्रत्याशी की ओर मोड़ने की भी कोशिश की लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। सपा की ओर से ब्राह्मण मतों की गोलबंदी देख मौर्य-कुशवाहा मतदाता भी अपने पाले में लौट गए। लिहाजा भाजपा प्रत्याशी को फिर से जीत मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें