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सोनभद्र: काकोरी रेल घटना की वर्षगांठ पर शहीदों को किया नमन, मनाया गया आजादी का अमृत महोत्सव

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राबर्ट्सगंज परासी शहीद स्थल पर आजादी के अमृत महोत्सव में राष्ट्रगान करते अतिथिगण।संवाद - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। राबर्ट्सगंज ब्लॉक के परासी दूबे गांव स्थित शहीद उद्यान में सोमवार को चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव और काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ पर आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम हुआ। वीर शहीदों को नमन किया गया। शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल व अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के वारिसों में चन्द्रकांत शर्मा, विजय शंकर चतुर्वेदी, रविशंकर चतुर्वेदी, कृपाशंकर चौबे, कौशलेश पाठक, ज्ञानचंद्र द्विवेदी, कृपाशंकर द्विवेदी, रामनरेश द्विवेदी, शशिभूषण पांडेय, वासुदेव तिवारी, मोहन बियार आदि को सम्मानित किया गया।
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समारोह में एलईडी के माध्यम से राज्यपाल आनंदीबेन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लाइव प्रसारण देखा गया। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने बैंड बाजा के साथ प्रभातफेरी निकाली। इसका समापन शहीद उद्यान परासी दूबे में हुआ। विंध्य शोध समिति के दीपक केशरवानी के लिखित पुस्तक जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल को भेंट किया गया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मंचासीन जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को आक्सीजन प्लांट का पौधा भी भेंट स्वरूप प्रदान किया गया। इस मौके पर घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्या, सदर विधायक भूपेश चौबे, जिलाध्यक्ष अपना दल सत्यनारायण पटेल, दिनेश बियार, ब्लाक प्रमुख अजीत रावत, सांसद प्रतिनिधि कुलदीप पटेल, प्रभारी जिलाधिकारी/सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा, एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह, एसडीएम सदर डॉ. कृपाशंकर पांडेय, डीडीओ रामबाबू त्रिपाठी, बीएसए हरिवंश कुमार, मदन गोपाल कसेरा, डीपीआरओ विशाल सिंह, एआरओ रिपूसुदन आर्य आदि रहे। संचालन भोलानाथ मिश्र ने किया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगल बियार किए गए याद
घोरावल। स्वतंत्रता संग्राम की 75वीं वर्षगांठ पर पूरा देश आजादी के महानायकों को याद कर रहा है। ऐसे में घोरावल क्षेत्र के कुसुम्हा गांव के मंगल बियार को भी याद किया जा रहा है। गुलामी की बेड़ियों में देश को जकड़ा हुआ देखकर कुसुम्हा गांव के मंगल बियार ने आजादी की लड़ाई में कूदने का संकल्प लिया। किशोरावस्था में ही वे स्वतंत्रता संग्राम के महानायक महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, सरदार पटेल से प्रभावित थे। मंगल बियार कई बार जेल गए और यातनाएं भी सहीं।
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कुसुम्हा गांव में 23 जनवरी 1895 में भरत बियार के घर जब पुत्र रत्न के रूप में मंगल बियार ने जन्म लिया तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह पुत्र भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर कुल का नाम रोशन करेगा। मंगल बियार बचपन से ही आजादी की लड़ाई की कहानियों को सुनकर बड़े हुए। उनके प्रपौत्र मोहन बियार ने बताया कि उनके परदादा मंगल बियार एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनकी दादी बसंती देवी ने उन्हें बचपन में बताया कि मंगल बियार ने कभी हल की मूठ नही पकड़ी और सिर्फ आजादी की लड़ाई की अलख जगाते रहे। बताया कि परासी गांव में सभा के दौरान घोड़े दौड़ाए गए थे, जिसमें वह घायल भी हुए थे। आजादी के बाद जब जिला कलक्टर ने उनसे पेंशन व अन्य सुविधाओं के लिए निवेदन किया तो उन्होंने कलक्टर को यह कहते हुए लौटा दिया था कि उन्हें भारत माता की सेवा की कीमत नहीं चाहिए। उनके प्रपौत्र मोहनलाल बियार ने उनकी याद में गांव में एक स्मृति स्थल का निर्माण कराया है, जहां प्रतिवर्ष कार्यक्रम किया जाता है।
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