सोनभद्र। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने के लिए लाखों रुपये दान देने वाले बहुत हैं, मगर सोनभद्र की सीता का योगदान भी कम नहीं है। अपने आराध्य देव के मंदिर के लिए सीता ने दस वर्षों तक एक-एक रुपये जुटाए थे। मंदिर निर्माण के लिए जब संग्रहण अभियान शुरू किया तो उन्होंने गुल्लक तोड़कर यह धनराशि समर्पित की थी। अब वर्षों बाद टेंट से निकलकर प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में विराजमान होने को लेकर वह काफी खुश हैं। उनकी इच्छा है कि वह शीघ्र अयोध्या पहुंचकर नए मंदिर में अपने प्रभु के दर्शन करें।
राबर्ट्सगंज नगर के शीतला मंदिर के समीप मिट्टी के बर्तन बेचने वाली सीता देवी की प्रभु श्रीराम में गहरी श्रद्धा है। अपने आराध्य को टेंट में देखकर सीता मन ही मन दुखी होती थीं। उन्हें पूरा भरोसा था कि उनके प्रभु का भव्य मंदिर जरूर बनेगा। जब ऐसा होगा, तो उसमें अपना भी योगदान सुनिश्चित करने के लिए वह वर्षों से गुल्लक में पैसे एकत्रित कर रही थीं। हर रोज अपनी आमदनी में से घरेलू खर्चों के बाद एक से दो रुपये प्रभु श्रीराम के लिए गुल्लक में डालती थीं। करीब दो साल पहले जब मंदिर निर्माण के लिए आरएसएस ने धन संग्रहण अभियान शुरू किया तो सीता ने अपना गुल्लक उनके सामने रख दिया। गुल्लक फोड़ने पर उसमें से नौ हजार रुपये निकले। करीब दो हजार रुपये बेटे ने मिलाकर मंदिर निर्माण के लिए 11 हजार की राशि अर्पित की थी। उनकी श्रद्धा देख हर कोई हैरान रह गया था। अब जब मंदिर मूर्त रूप ले चुका है और उसमें प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी शुरू हुई तो सीता देवी काफी उत्साहित हैं। बुधवार को नगर में निकले पूजित अक्षत कलश शोभायात्रा में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सीता देवी का कहना है कि प्रभु श्रीराम ने उनकी हर इच्छा पूरी की। अब उन्हें शीघ्र भव्य मंदिर में देखने की इच्छा है। वह जल्द ही अयोध्या भी जाएंगी।