दुद्धी विकास खंड के ग्राम पंचायत धूमा मेें शौचालयों निर्माण कराने केे नाम पर करीब 29 लाख रुपये की हेराफेरी सामने आई है। धन अवमुक्त होने के बाद भी शौचालयों का निर्माण नहीं कराया गया। शिकायत पर जांच में पुष्टि के बाद डीपीआरओ ने सेक्रेट्री को निलंबित कर दिया है। महिला ग्राम सचिव के भी निलंबन की संस्तुति करते हुए डीडीओ को रिपोर्ट भेजी गई है। प्रधान और सचिव से धनराशि की रिकवरी भी कराई जाएगी।
कुछ दिन पूर्व धूमा गांव निवासी प्यारे मोहन ने मंडलायुक्त को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने डीपीआरओ को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। डीपीआरओ विशाल सिंह ने अपर जिला पंचायत राज अधिकारी, सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी (प्राविधिक) और जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के साथ मौके पर जाकर जांच की तो काफी हद तक शिकायत सही मिली। ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने शौचालय निर्माण के नाम पर बिना शौचालय बनवाए ही कोष से धनराशि निकालकर गबन करने की पुष्टि की। जांच में 230 शौचालय अपूर्ण या अनारंभ पाए गए। प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की दर से 27.60 लाख और इसके अतिरिक्त 1.99 लाख रुपये की धनराशि आहरित कर ली गई है। जांच में 16 शौचालय निर्मित कराने की बात मौखिक रूप से बताई गई लेकिन उसका कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। डीपीआरओ ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए 29.59 लाख रुपये ग्राम पंचायत कोष से आहरित कर ग्राम प्रधान राम प्रसाद, सचिव चांदनी गुप्ता और सेक्रेट्री उमेश चंद्र ने दुरुपयोग किया है। इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगे जाने पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं था। तत्कालीन सेक्रेट्री उमेश चंद्र को निलंबित करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। ग्राम सचिव रहीं चांदनी गुप्ता के निलंबन और अनुशासनिक कार्रवाई के लिए डीडीओ को पत्र भेजा गया है। कहा कि दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने, दुरुपयोग की गई धनराशि की वसूली करने की कार्रवाई की जा रही है।