रिहंद हाइड्रो की छठी इकाई का जेनरेटिंग ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य पूरा हो गया है। इकाई का ट्रायल आपरेशन किया जा रहा है। 72 घंटे के ट्रायल आपरेशन के बाद इकाई के शुक्रवार से रूटीन लोड पर आने की उम्मीद है।
प्रदेश में विद्युत उत्पादन के मेरूदंड रिहंद डैम के मुहाने पर रिहंद जल विद्युत गृह का निर्माण किया गया है। परियोजना की 50 मेगावाट क्षमता वाली छह इकाइयों से 300 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है। निर्माण के बाद से ही विद्युत संयंत्र के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग माने जाने वाले जेनरेटिंग ट्रांसफार्मर को न बदले जाने से इकाइयों के संचालन में समस्या आ रही थी। इसे देखते हुए प्रबंधन ने सभी इकाइयों को अपग्रेड करते हुए जीटी बदलने के साथ ही इसकी क्षमता में भी वृद्धि की। परियोजना के एक्सईएन एसके राय ने बताया कि अब इकाइयों में 60 एमवीए की जगह 67.5 एमवीए का जीटी लगाया जा रहा है। छठी इकाई के जीटी बदलने का कार्य सफलता पूर्वक पूरा किया जा चुका है। सोमवार शाम को जीटी चार्ज करने के बाद इकाई का ट्रायल आपरेशन शुरू किया गया है। इस दौरान बुधवार को इकाई को 50 मेगावाट के फुल लोड पर भी संचालित किया गया है। अभी तक सब कुछ पैरामीटर के अनुरूप है। शुक्रवार को ट्रायल आपरेशन पूरा होने के बाद रूटीन उत्पादन शुरू हो जाएगा।
अगले सप्ताह शट डाउन होगी पांचवीं इकाई
एक्सईएन ने बताया कि अभी तक तीन इकाइयों का जीटी बदला जा चुका है। छठी के बाद आगामी सप्ताह जीटी बदलने के लिए पांचवीं इकाई को शट डाउन लिया जाएगा। उसके बाद पहली इकाई के जीटी बदलने का कार्य किया जाएगा। जीटी बदल जाने के बाद आगामी डेढ़ दशक तक इकाइयों से निर्बाध विद्युत उत्पादन हो सकेगा।
एक रुपये से भी कम प्रति यूनिट है रिहंद हाइड्रो की बिजली
रिहंद हाइड्रो की बिजली का दर प्रदेश में सर्वाधिक किफायती है। सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों के विभिन्न विद्युत संयंत्रों से जहां पावर कारपोरेशन को दो से आठ रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली प्राप्त होती है। रिहंद हाइड्रो से महज 91 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली प्राप्त होती है।