जिला हॉकी एसोसिएशन के सचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि सुविधाओं के बिना खिलाड़ियों की प्रतिभा दम तोड़ रही है। शहर में कुछ स्कूलों के पास भी अच्छे ग्राउंड हैं, मगर वह खिलाड़ियों को वहां घुसने भी नहीं देना चाहते। खेलों के प्रति ऐसा उपेक्षा भाव रहेगा तो कहां से प्रतिभाएं निकलेंगी।
हॉकी खिलाड़ी अमरजीत यादव ने कहा कि हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है, बावजूद उसे प्रोत्साहन न मिलना दुखद है। यहां के खिलाड़ी अपने प्रयासों से ग्राउंड बनाकर अभ्यास कर रहे हैं। कई अच्छे खिलाड़ी भी निकले हैं। अगर सुविधाएं मिलती तो इस खेल के प्रति रुझान अन्य खिलाड़ियों का भी रुझान बढ़ता।
हॉकी खिलाड़ी गोंवद कुमार ने कहा कि ग्राउंड के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से वार्ता की गई, मगर किसी ने कोई रुचि नहीं दिखाई। पहाड़ी पर अभ्यास करने में भी अब कुछ लोग अवरोध पैदा कर रहे हैं। इससे मन खिन्न हो जाता है। खेलों को आगे बढ़ाने की बातें हो रही हैं, लेकिन यहां की उदासीनता समझ से परे है।
हॉकी के प्रति खिलाड़ियों की दीवानगी को देखते हुए ही करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम एस. राजलिंगम ने उनके लिए ग्राउंड बनाने का प्रस्ताव तैयार कराया था। इसके तहत यहां एस्ट्रोटर्फ का मैदान बनाया जाना था। इसके लिए एनसीएल को सीएसआर फंड से धनराशि देने को कहा गया था। प्रस्ताव पर काम होता, इससे पहले ही उनका तबादला हो गया।
इसके साथ ही यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। तब से कई बार खिलाड़ी और जिला हॉकी एसोसिएशन डीएम से लेकर सीएम को कई पत्र सौंप चुका है, लेकिन कोई भी इसमें रुचि नहीं दिखा रहा। इससे खिलाड़ियों में मायूसी बनी हुई है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में उदासीन बने हुए हैं।