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खेल दिवस: ललक ऐसी कि मैदान नहीं मिला तो पहाड़ी पर खेल रहे हॉकी, सुविधाओं के अभाव में भी राष्ट्रीय खेल को आगे बढ़ा रहे प्रतिभावान

Sun, 29 Aug 2021 11:15 AM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र

सार

आदिवासी बहुल सोनभद्र जिले में खेलों के प्रति युवाओं का काफी रुझान रहा है। तीरंदाजी में यहां के कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर मेडल जीत चुके हैं। हॉकी खेलने की ललक ऐसी है कि सुविधा और संसाधन की कमी भी छोटी पड़ रही है। 
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चुर्क में पुलिस लाइंस के समीप पहाड़ी पर हॉकी खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्रिकेट का जादू युवाओं के सिर चढ़कर भले ही बोल रहा हो, लेकिन राष्ट्रीय खेल हॉकी के प्रति भी यहां दीवानगी कम नहीं है। हॉकी खेलने की ललक ऐसी है कि सुविधा और संसाधन की कमी भी छोटी पड़ रही है। मैदान नहीं मिला तो युवाओं ने पहाड़ी को ही अपना ग्राउंड बना लिया। उनके पास कोच नहीं है तो वह खुद एक-दूसरे को देखकर सीख रहे हैं। इस पथरीले मैदान पर ही खेलकर और सीखकर कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्पर्धाओं का हिस्सा बने हैं तो कुछ ने स्पोर्ट्स हॉस्टल में भी दाखिला लिया है। 
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आदिवासी बहुल सोनभद्र जिले में खेलों के प्रति युवाओं का काफी रुझान रहा है। तीरंदाजी में यहां के कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर मेडल जीत चुके हैं। इसके लिए जिला स्टेडियम में हॉस्टल की भी सुविधा है। क्रिकेट, एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, वेट लिफ्टिंग के लिए भी कई ग्राउंड, ट्रैक उपलब्ध हैं, मगर राष्ट्रीय खेल हॉकी के लिए कोई सुविधा नहीं है।

संसाधनों की बेहद कमी के बावजूद इस खेल में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। उन्होंने चुर्क में पुलिस लाइंस के समीप पहाड़ी को ही अपना मैदान बना लिया है। उबड़-खाबड़ और पथरीले मैदान पर खतरे से बेपरवाह होकर खिलाड़ी रोजाना शाम को गेंद के पीछे सरपट भागते हैं तो देखने वाले भी खेल के प्रति इनके लगन और समर्पण को सराहे बिना नहीं रह पाते।
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इन खिलाड़ियों में शिवाकांत, अमरजीत, संजय, संतोष, आकाशदीप, सुमित और दीपक सहित कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में भी हिस्सा लिया है। यही सीनियर खिलाड़ी ही नए लड़कों को खेल की बारीकियां भी सीखा रहे हैं और खुद भी अभ्यास कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों का कहना है कि अगर उन्हें ग्राउंड मिल जाए तो वह और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

जिला हॉकी एसोसिएशन के  सचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि  सुविधाओं के बिना खिलाड़ियों की प्रतिभा दम तोड़ रही है। शहर में कुछ स्कूलों के पास भी अच्छे ग्राउंड हैं, मगर वह खिलाड़ियों को वहां घुसने भी नहीं देना चाहते। खेलों के प्रति ऐसा उपेक्षा भाव रहेगा तो कहां से प्रतिभाएं निकलेंगी। 

हॉकी खिलाड़ी अमरजीत यादव ने कहा कि  हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है, बावजूद उसे प्रोत्साहन न मिलना दुखद है। यहां के खिलाड़ी अपने प्रयासों से ग्राउंड बनाकर अभ्यास कर रहे हैं। कई अच्छे खिलाड़ी भी निकले हैं। अगर सुविधाएं मिलती तो इस खेल के प्रति रुझान अन्य खिलाड़ियों का भी रुझान बढ़ता। 

हॉकी खिलाड़ी गोंवद कुमार ने कहा कि  ग्राउंड के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से वार्ता की गई, मगर किसी ने कोई रुचि नहीं दिखाई। पहाड़ी पर अभ्यास करने में भी अब कुछ लोग अवरोध पैदा कर रहे हैं। इससे मन खिन्न हो जाता है। खेलों को आगे बढ़ाने की बातें हो रही हैं, लेकिन यहां की उदासीनता समझ से परे है। 
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एस्ट्रोटर्फ ग्राउंड के लिए बना था प्रस्ताव, ठंडे बस्ते में रह गया

हॉकी के प्रति खिलाड़ियों की दीवानगी को देखते हुए ही करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम एस. राजलिंगम ने उनके लिए ग्राउंड बनाने का प्रस्ताव तैयार कराया था। इसके तहत यहां एस्ट्रोटर्फ का मैदान बनाया जाना था। इसके लिए एनसीएल को सीएसआर फंड से धनराशि देने को कहा गया था। प्रस्ताव पर काम होता, इससे पहले ही उनका तबादला हो गया।

इसके साथ ही यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। तब से कई बार खिलाड़ी और जिला हॉकी एसोसिएशन डीएम से लेकर सीएम को कई पत्र सौंप चुका है, लेकिन कोई भी इसमें रुचि नहीं दिखा रहा। इससे खिलाड़ियों में मायूसी बनी हुई है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मामले में उदासीन बने हुए हैं।
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