सोनभद्र के श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी 13 अगस्त दिन शुक्रवार को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन काल सर्प दोष निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान व रुद्राभिषेक कराये जाने का विधान है। ऐसे में नाग पंचमी को पूजा कराने वालों के लिए पंचमी तिथि रहते पूजन अनुष्ठान कराना चाहिए। इसका विशेष फल साधकों को मिलता है। नाग पंचमी की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को तैयारी में जुटे रहे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. एसएन तिवारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को ही दोपहर में 3:33 मिनट के बाद पंचमी तिथि शुरू हो गई। शुक्रवार को दोपहर 1:47 मिनट तक पंचमी तिथि रहेगी। नाग पंचमी के दिन पूजा अर्चन करने वालों को पंचमी तिथि रहते ही पूजा अर्चन कर लेनी चाहिए। आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 5:49 बजे से 8:28 बजे तक काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजन करने का उत्तम मुहूर्त है। षोडषोपचार विधि से अनुष्ठान कराना फलदायी होता है।
इसके अलावा भगवान भोलेनाथ का दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही इस दिन आस्थावान नाग देव को दूध लावा चढ़ाकर पूजन करते है। गाय के गोबर से घर के मुख्य द्वार पर नाग देव का प्रतीक चिह्न बनाते हुए घर को घेरा जाता है। ताकि नाग देव का घर में वास न हो। यही नहीं गांवों में गोशाला में इस दिन हवन पूजन किया जाता है।
नाग पंचमी के अवसर पर ग्रामीण इलाकों में कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाता है। इस दिन खेलकूद की अन्य प्रतियोगिताएं भी होती है। सावन के झूले डालकर महिलाओं और बच्चों की टोली झूलने में लगी है। हालांकि नाग पंचमी पर यह सब अब कोरम अदायगी तक रह गया है।