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दो सौ से अधिक ईंट भट्ठों पर लगेगा ताला

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सोनभद्र। पर्यावरण के लिए खतरा बने मिर्जापुर-सोनभद्र के 200 से अधिक ईंट भट्ठों पर अब ताला लग जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न लेने वाले इन ईंट भट्ठों को हाईकोर्ट ने सख्ती से बंद कराने का आदेश दिया है। बोर्ड की ओर से ऐसे भट्ठों को चिह्नित कर बंद करने की नोटिस जारी की जा रही है। अब तक पचास से अधिक भट्ठा संचालकों को नोटिस तामिल भी करा दी गई है। उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वह किसी भी हाल में भट्ठा नहीं चलाएंगे। अगर इसकी अनदेखी की तो उन पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से भट्ठा संचालकों की तो कमर टूटेगी ही निर्माण कार्य कराने वालों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी होने वाली है। तेजी से बढ़ता प्रदूषण चिंता का सबब बनता जा रहा है। लिहाजा प्रदूषण रोकने के लिए हर संभव उपाय अपनाए जा रहे हैं। नए पौधे लगाने के अलावा औद्योगिक संस्थाओं में भी प्रदूषण को कम करने वाले नई तकनीक के उपकरणों को लगाने पर जोर दिया जा रहा है। ईंट भट्ठों के लिए भी वर्ष 2012 में ऐसी ही गाइड लाइन जारी की गई थी। इसमें साफ कहा गया था कि जो भी ईंट भट्ठा इस मानकों का पालन नहीं करता उसे तत्काल बंद कर दिया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी भी इसमें मुख्य थी। बार-बार पत्र जारी कर विभाग की ओर से भट्ठा संचालकों को हिदायत दी जाती रही है। संचालक कभी सरकार से राहत तो कभी कोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत पा लेते थे, मगर अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन न करने वाले किसी भी ईंट भट्ठा का संचालन नहीं होने देना है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से ऐसे ईंट भट्ठों को चिह्नित कर नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दोनों जिलों में करीब दो सौ से अधिक ईंट भट्ठों में नियमों का पालन नहीं हो रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इनके संचालकों को नोटिस देकर भट्ठा बंद करने की हिदायत दी जा रही है। इस सख्ती के बाद भट्ठा संचालकों में खलबली मची हुई है।
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भट्ठे बंद हुए तो यह होगा असर
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय सोनभद्र के अंतर्गत सोनभद्र और मिर्जापुर जिले में करीब ढाई सौ ईंट भट्ठों का संचालन हो रहा है। ज्यादातर ईंट भट्ठे निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते। लिहाजा इनका बंद होना लगभग तय है। ईंट भट्ठे बंद हुए तो संचालकों के साथ यहां काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। इससे भी ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा, जो भवन निर्माण करा रहे हैं। ईंट का निर्माण ठप होने से आपूर्ति भी कम हो जाएगी। ऐसे में रेट बढ़ना स्वाभाविक है।
ईंट भट्ठे के लिए यह है मानक:
* नगर निगम या नगर परिषद से पांच किमी के दायरे में कोई भट्ठा संचालित नहीं होगा। इससे बाहर 100 से 150 की आबादी वाले क्षेत्र से करीब पांच सौ मीटर और जहां 150 से अधिक आबादी है, वहां से एक किमी दूरी का मानक है।
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* अस्पताल, स्कूल, धार्मिक स्थल, सार्वजनिक भवन आदि से एक किमी, वन्य जीव अभ्यारण्य और ऐतिहासिक स्मारक से पांच किमी दूरी होनी चाहिए।
* रेलवे ट्रैक से दो सौ मीटर और एनएच व एसएच से तीन सौ मीटर की दूरी पर भट्ठा स्थापित नहीं होगा।
* कोयले की राख के निस्तारण, ध्वनि प्रदूषण से सुरक्षा, चारों ओर दोहरी दीवार होनी चाहिए।
हाई ड्राफ्ट तकनीक जरुरी
ईंट भट्ठों को हाई ड्राफ्ट बनाने के लिए चिमनी को छोड़कर पूरा भट्ठा दोबारा बनाना पड़ेगा। इसमें 2 पंखे और दो जेनरेटर रखने होंगे। इससे ईंट बनाने में निकलने वाली धूल नीचे ही रह जाएगी और हवा में मोटे कण नहीं जाएंगे। अभी एक ईंट भट्ठे से जितना प्रदूषण होता है, वह नई तकनीक के बाद एक तिहाई ही रह जाएगा। इस सिस्टम को लगाने में करीब 40 लाख रुपये खर्च आएगा। यह सिस्टम वह ही लगा सकता है जिसकी खुद की जमीन पर भट्ठे चल रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब दो सौ ईंट भट्ठों को बंद करने के लिए नोटिस जारी की जा रही है। भट्ठा संचालकों को नोटिस तामिल कराने के लिए दो टीमें लगाई गई है। जहां संचालक नहीं मिल रहे, वहां नोटिस चस्पा कराई जा रही है। मानक का पालन करने के लिए काफी समय दिया जा चुका है। अब किसी भी हाल में इन ईंट भट्ठों का संचालन नहीं हो पाएगा। -राधेश्याम, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न लेने वाले भट्ठों को बंद करने के आदेश की जानकारी मिली है। भट्ठा बंद हुआ तो संचालकों के साथ मजदूरों के समक्ष संकट खड़ा हो जाएगा। ईंट के रेट बढ़ जाएंगे। जनहित को देखते हुए संगठन राहत दिलाने का प्रयास कर रहा है। कानूनी लड़ाई भी लड़ी जा रही है। जल्द ही कोई मार्ग ढूंढ लिया जाएगा। -सत्येंद्र सिंह, उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश ईंट निर्माता समिति।
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