अप्रैल में अभी तीन सप्ताह ही बीते हैं मगर बिजली की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। बृहस्पतिवार को सूबे में बिजली की न्यूनतम मांग 17 हजार मेगावाट के आंकड़े को भी पार कर गई। यह इस वर्ष की सबसे अधिक न्यूनतम मांग है। अब तक यह मांग 15 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई थी। कोयला संकट के बीच बिजली की बढ़ती मांग चिंता बढ़ाती जा रही है।
भीषण गर्मी में लोगों को राहत देने के लिए एक ओर जहां परियोजनाओं को फुल लोड पर चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर बिजली की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। अधिकारियों की मानें तो हर साल से ज्यादा इस साल ही अप्रैल में अधिक गर्मी प्रारंभ हुई है। इससे लगातार मांग बढ़ती ही जा रही है। पिछले साल जहां अप्रैल माह में बिजली की अधिकतम मांग 19837 मेगावाट तक पहुंची थी, वहीं इस सत्र में न्यूनतम मांग का आंकड़ा ही 17 हजार मेगावाट पार कर चुका है। अप्रैल की शुरुआत से ही इस आंकड़े में बढ़त दर्ज की जा रही है। बुधवार को न्यूनतम मांग 14 हजार मेगावाट दर्ज की गई। अचानक से बृहस्पतिवार को न्यूनतम मांग का आंकड़ा 17052 मेगावाट तक पहुंच गया। अधिकतम मांग 20368 मेगावाट पर बनी रही।
अब लैंको की दूसरी इकाई से उत्पादन ठप
तकनीकी खराबी के कारण लैंको परियोजना की दूसरी इकाई से विद्युत उत्पादन ठप हो गया है। परियोजना के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी ने बताया कि ब्वायलर ट्यूब लिकेज के कारण 600 मेगावाट की दूसरी इकाई ट्रिप कर गई है। विशेषज्ञ अभियंताओं के निर्देशन में युद्ध स्तर पर अनुरक्षण कार्य किया जा रहा है। शुक्रवार को इकाई को लोड पर ले लिया जाएगा। बिजली की बढ़ी मांग के बीच इकाई के बंद होने से प्रदेश में विद्युत संकट गहरा गया है।