मां की चीख सुनकर उठ गए बच्चे
लौबंद गांव में महिला की हत्या के बाद उसके दोनों बेटे डरे-सहमे हैं। घटना के वक्त वह मां के पास ही मौजूद थे। अपनी आंखों के सामने पूरा दृश्य देखा। उस मंजर को याद कर वह सहम जा रहे हैं। उनमें मां की मौत का दुख है तो उससे भी ज्यादा गुस्सा अपने पिता के प्रति है।
देवंती की दो बेटियां गीता और सुनीता हैं। गीता की शादी हो चुकी है, जबकि सुनीता 17 वर्ष की है। उसके बाद दो बेटे मोहर सिंह 13 और अमर सिंह 11 वर्ष का है। घटना के समय छोटा बेटा मां के बगल में ही सो रहा था। सुनीता और मोहर थोड़ी दूर पर थे। मोहर व अमर सिंह के मुताबिक शाम को घर में दस अंडा बना था। इसे खाने के बाद सभी लोग सो गए। शाम को ही दीदी (सुनीता) ने बताया था कि आज पिता मां की पिटाई करेगा, तुम लोग जागते रहना ताकि उसे बचा सकें। काफी देर तक दोनों भाई बिस्तर में ही जाग रहे थे, मगर न जाने कब नींद लग गई।
बच्चों को भी पीटा
करीब तीन बजे अचानक मां की चीख सुनकर आंख खुली तो पिता कुल्हाड़ी से उन्हें मार रहे थे। बीच बचाव के लिए भाई-बहन आए तो उनको भी पीटा। बेटी सुनीता ने बताया कि पिता ने कुल्हाड़ी से एक ही जगह तीन वार किए। मां के घायल होने पर उसी ने एंबुलेंस को फोन कर बुलाया और फिर अस्पताल ले गई। बताया कि पिता अक्सर मां की पिटाई करता था और मां उसे सहती रहती थी। वह बुदबुदा रहा था कि आज फिर पीटेंगे, लेकिन किसी को यह अहसास नहीं था कि मां की जान ही ले लेगा।
सुनीता ने कहा कि मां मजदूरी कर हम भाई-बहनों को पालती थी। पिता घर में पैसे नहीं देते और कभी देते भी तो उसे ले लेते थे। शुक्रवार को भी मां से सौ रुपये मांग रहे थे। मां ने शनिवार तक पैसे मिलने पर देने को कहा तो वह गुस्से में आ गए। मां के मौत की खबर सुनकर पहुंची बड़ी बेटी गीता ने बताया कि पिता मजदूरी के लिए रेणुकूट में रहता था। कई-कई दिन बाद घर आता था। वह मां पर शक करता था, लेकिन मां का स्वभाव बहुत अच्छा था।