सोनभद्र। वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं वृहस्पतिवार को जीवितपुत्रिका (जीमूतवाहन) का व्रत रखेंगी। निर्जला रहकर महिलाएं जिउतिया की पूजा करेंगी। पूर्व संध्या पर बुधवार को राबर्ट्सगंज सहित अन्य बाजारों में जिउतिया और फल खरीदने वालों की भीड़ उमड़ी रहीं। शहरी इलाकों में रहने वाले आस्थावान ग्रामीण इलाके के लोगों से संपर्क कर काश (जूर) भी मंगाए। जीमूतवाहन स्वरूप में जूर रखकर महिलाएं पूजन करेंगी।
ज्योतिषाचार्य डा.एसएन तिवारी ने बताया कि पूर्वांचल की महिलाएं जीवितपुत्रिका व्रत रखती हैं। बुधवार की रात 9.44 बजे नहाय खाय के साथ जिउतिया व्रत शुरू हो रहा है। महिलाएं 11 सितंबर को जिउतिया व्रत का पारण सूर्य के उदय होने पर करेंगी। उन्होंने बताया कि जिउतिया पर निर्जला व्रत रख रही महिलाएं 10 सितंबर की रात 10.47 बजे के बाद नवमी तिथि लगने पर जल पी सकती है। पौराणिक कथा बताते हुए ज्योतिषाचार्य ने कहा कि गंधर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे। युवाकाल में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। जीमूतवाहन पंक्षीराज गरूण से नागवंश की रक्षा किए थे। तभी से यह व्रत चला आ रहा है। मान्यता है कि इस व्रत के रखने से वंश वृद्घि और संतान दीर्घायु को प्राप्त होते है। महिला निर्जला रहकर जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। बुधवार को फल एवं जिउतिया की दुकानें बाजारों में सजीं रही। दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ी रहीं।