नगवां ब्लॉक के चकया गांव में अधूरा पड़ा शौचालय।
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सोनभद्र। जिले के ग्रामीण इलाकों में खुले में शौच मुक्त गांव व स्वच्छता अभियान मखौल बन कर रहा गया है। कागज में पूर्ण दिखाए गए शौचालय धरातल पर अधूरे हैं। दोनों किस्त की धनराशि जारी होने के बाद भी शौचालय का निर्माण या तो अधूरा है या फिर प्रयोग करने लायक नहीं है। यह हकीकत है नगवां ब्लॉक के सुदूर गांवों की। इसी तरह की स्थिति कोन सहित अन्य ब्लॉकों की भी है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत वर्ष 2014 से 2018 के बीच नगवां ब्लॉक में कुल 17,142 शौचालय ग्राम पंचायतों में आवंटित हुआ। जिनका निर्माण कागजों पर कर दिया गया है। नगवां ब्लॉक के 52 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ भी घोषित कर दिया गया है, लेकिन मौके पर देखा जाए तो आवंटित शौचालय में से महज आठ से नौ हजार शौचालय ही धरातल पर दिखाई देंगे। इसमें भी आधे से ज्यादा बने शौचालय प्रयोग करने लायक नहीं है। गांवों में बने अधिकांश शौचालयों में लकड़ी, उपली व अन्य सामान रखे जा रहे हैं। नगवां ब्लॉक के ग्राम पंचायत कजियारी में कागज पर 345 शौचालय का निर्माण पूर्ण है, लेकिन मौके पर महज सवा सौ शौचालय ही है। ज्यादातर शौचालय प्रयोग के लायक नहीं है। ग्राम पंचायत सरायगढ़, चकयां सहित अन्य गांव जो ओडीएफ घोषित किए गए हैं। उन गांवों में शौचालय की स्थिति बेहद खराब है। चकरा गांव के शौचालय लाभार्थी जवाहिर और राजकुमारी का कहना है कि शौचालय निर्माण ब्लॉक के अधिकारियों को कराना था। शौचालय बनने के बाद से वैसे ही पड़ा हुआ है। ग्राम पंचायत बनबहुआर में 225 शौचालय बने हैं। लेकिन उपयोग में महज 30 से 40 शौचालय ही हैं। कुछ शौचालय आधे अधूरे हैं तो कुछ का फाउंडेशन ही खड़ा कर छोड़ दिया गया है। कुछ शौचालयों का गड्ढा भी नहीं बना है। यहीं हाल कम्हरिया ग्राम पंचायत का है। इसी प्रकार से ग्राम पंचायत आमडीह में शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। शौचालय इस्तेमाल लायक न होने से ग्रामीण खुले में शौच करने को विवश हैं।
बड़े पैमाने पर बरती गई अनियमितता
जिले में शौचालय निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। दुद्धी ब्लॉक के मुख्यमंत्री समग्र गांव बीड़र में बीते दिनों धरातल पर शौचालय निर्माण न होने की शिकायत सामने आई थी। चतरा ब्लॉक के सोढ़ा गांव में कई शौचालयों के निर्माण कागज पर किए जाने का मामला प्रकाश में आया था। इसमें 26 लाख से अधिक सरकारी धन का दुरुपयोग के आरोप भी लगे। मामले की जांच चल रही है।
जब विधायक को होना पड़ा परेशान
कोन ब्लॉक के निगाई गांव में शौचालय निर्माण में अनियमितता का उजागर उस समय हुआ था, जब सदर विधायक भूपेश चौबे का कार्यक्रम गांव में आयोजित हुआ। सदर विधायक को जब शौच लगी तो वे गांव में बने शौचालयों में गए, लेकिन वे प्रयोग करने लायक नहीं थे। अंत में गांव के एक व्यक्ति के घर बने शौचालय जाना पड़ा था। मामले जांच कराई जाए तो शौचालय निर्माण में करोड़ों का घोटाला सामने आएगा।