सोनभद्र। डिजिटल पब्लिक रजिस्टर के तहत फाॅर्मर रजिस्टर तैयार कराने और सर्वे में उदासीनता 139 गांवों के पंचायत सहायकों को भारी पड़ी है। डीपीआरओ ने सभी के सितंबर माह के मानदेय भुगतान पर रोक लगा दी है। उन्हें 29 सितंबर तक शत प्रतिशत कार्य पूरा करते हुए एडीओ पंचायत के समक्ष स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उनके विरुद्ध अन्य विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हर गांव का डिजिटल रजिस्टर तैयार करने के लिए गांव में सर्वे कर फाॅर्मर रजिस्टर तैयार कराया जा रहा है। इसमें गांव के हर किसान का पूरा ब्योरा रखा जाना है। सर्वे के लिए ग्राम पंचायतों में तैनात पंचायत सहायकों को बतौर सर्वेयर नियुक्त किया गया है। सर्वे का कार्य 31 जुलाई तक पूरा करना था। तमाम कवायदों और निर्देशों के बाद भी जिले की प्रगति अच्छी नहीं है। पिछले दिनों जिला स्तर पर हुई समीक्षा में काफी खराब स्थिति रहने पर कड़ी नाराजगी जताई गई थी। अब निर्धारित समय में कार्य पूरा न करने वाले पंचायत सहायकों पर डीपीआरओ ने कार्रवाई की है। डीपीआरओ नमिता शरण ने बताया कि कार्य में रुचि न लेने और लापरवाही बरतने वाले 139 गांवों के पंचायत सहायकों का सितंबर का मानदेय रोक दिया गया है। उन्हें 29 सितंबर तक की मोहलत देते हुए शत-प्रतिशत कार्य पूरा कराने और पंचायत सहायक के समक्ष अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए है। तय समय सीमा में जहां काम पूरा नहीं होगा, उन गांवों के पंचायत सहायक पर आगे की कार्रवाई होगी।
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म्योरपुर और नगवां में स्थिति सबसे खराब
जिन गांवों में सर्वे कार्य की गति सबसे सुस्त है, उसमें म्योरपुर ब्लॉक पहले नंबर पर है। यहां के 40 गांवों में सर्वे पूरा नहीं हो पाया है। संबंधित पंचायत सहायकों का मानदेय रोका गया है। इसके बाद नगवां के 29 गांव हैं। ये दोनों ब्लॉक सुदूरवर्ती व दुरुह क्षेत्रों वाले हैं। इनमें से कई जगह नेटवर्क व कनेक्टिविटी की भी समस्या है। सर्वे पिछड़ने का यह भी एक कारण है। इन ब्लॉकों के अलावा रॉबर्ट्सगंज के 20, करमा के 14, बभनी के 18, दुद्धी के 10, चतरा के 5 और कोन ब्लॉक के 3 गांवों के पंचायत सहायकों पर कार्रवाई की गई है।