सोनभद्र। नगर पालिका परिषद सोनभद्र के खसरा-खतौनी रजिस्टर को गायब हुए छह साल से अधिक समय हो गया। मगर, अब तक पता नहीं चल सका है। गायब हुए रजिस्टर को लेकर विभागीय जांच के साथ ही कुछ लोगों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। नगर पालिका का रजिस्टर किसने गायब करवाया, रजिस्टर गया कहां, इस तरह के कुछ अन्य सवालों को लेकर जिम्मेदार अब तक चुप्पी साधे हुए हैं।
नगर पालिका क्षेत्र के लोगों की जमीन पर कब्जे और उनके मालिकाना हक के प्रमाणीकरण के लिए नगरपालिका के अस्तित्व में आने के पूर्व से ही खसरा-खतौनी रजिस्टर बना हुआ था। इस रिकार्ड के आधार पर ही लोगों को जमीन की खसरा-खतौनी जारी की जाती थी। जमीन की खरीद-बिक्री के साथ ही जमीन पर लोन, होम लोन, नक्शा पास कराए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। प्रत्येक जमीन की बिक्री के एवज में खरीदार नगर पालिका में एक निश्चित शुल्क जमा कर रसीद भी कटवाता था। करीब छह साल पहले खसरा-खतौनी रजिस्टर ही गायब हो गया। इस मामले में विभागीय जांच बैठाते हुए एफआईआर भी कराई गई, लेकिन रजिस्टर गया कहां और किसने तथा क्यों गायब किया, इस सवालों का जवाब अब तक सामने नहीं आ पाया है। उधर, जमीनों के कब्जे में हेरफेर दिखाकर कथित तौर पर कुछ रसूखदारों को लाभ पहुंचाने के लिए रजिस्टर गायब किए जाने की बात अब भी चर्चा में बनी हुई है।
दो साल पहले हुए सर्वे का पता नहीं
नगर पालिका प्रशासन ने खसरा रजिस्टर गायब होने के बाद पालिका क्षेत्र में स्थित नजूल की जमीन की खोज के लिए नए सिरे से सर्वे शुरू कराया था। सर्वे में प्रशासन व नगर पालिका के राजस्व कर्मियों की संयुक्त टीमें लगाई गई थी। सर्वे के लिए कुल पांच टीमें गठित की गई थी। दावा किया जा रहा था कि सर्वे के बाद ही पता चल पाएगा कि नगर पालिका की कितनी नजूल की जमीन पर अन्य लोगों का कब्जा है और कितनी जमीन खाली पड़ी है। सर्वे में लगी सभी टीमें दो साल पहले ही अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप चुकी हैं। लेकिन दो साल बाद भी सर्वे का प्रकाशन नहीं हो सका है।
खसरा-खतौनी रजिस्टर गायब होने का प्रकरण छह साल पुराना है। नए सिरे से रजिस्टर तैयार करने के लिए पूर्व में सर्वे कराया गया था। सर्वे रिपोर्ट का जल्द ही प्रकाशन कराया जाएगा। साथ ही आपत्ति मांगी जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। - विजय कुमार यादव, अधिशासी अधिकारी-नगर पालिका परिषद सोनभद्र।