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Sonbhadra: दुद्धी को जिला बनाने की मांग को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन, सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप

Sat, 19 Aug 2023 05:46 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र

सार

उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित दुद्धी को अलग जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। शनिवार को भी जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर आंदोलन को समर्थन दिया।
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दुद्धी को जिला बनाने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने सौंपा ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लंबे समय से दुद्धी को जिला बनाने की मांग कर रहे लोगों ने शनिवार को जोरदार ढंग से विरोध प्रदर्शन किया। जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिला बनाओ-विकास कराओ का नारा बुलंद करते हुए सोनभद्र कचहरी गेट से जुलूस निकालकर तहसील परिसर पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। दुद्धी और सिविल बार के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहकर आंदोलन को समर्थन दिया।

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सिविल बार के अध्यक्ष रामलोचन तिवारी, दुद्धी बार के अध्यक्ष रामपाल जौहरी और जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के महासचिव प्रभु सिंह ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। कहा कि विगत चुनाव में सत्ताधारी दल के कई नेताओं ने वादा किया सरकार बनने पर दुद्धी को जिला अवश्य बनाएंगे।

दुद्धी की आबादी 14 लाख से ज्यादा

अब सरकार बन जाने पर दुद्धी को जिला बनाने की उनकी मंशा नहीं है। यह जनता के साथ छलावा है, जिसे आदिवासी क्षेत्र के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रस्तावित जिले में दुद्धी तहसील के 305 राजस्व ग्राम और ओबरा तहसील के 84 राजस्व ग्राम शामिल हैं। तहसील के अंतर्गत 14 थाना तथा पांच विकास खंड कार्यालय कार्यरत हैं। इसकी आबादी 14 लाख और क्षेत्रफल 3380 किलोमीटर है।
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देश की विद्युत आवश्यकताओं का 10 प्रतिशत उत्पादन इसी क्षेत्र से होता है। शामली में 284, बागपत 287, हापुड़ में 331 और गौतमबुद्धनगर में 381 राजस्व ग्राम होने के बाद भी जिले का दर्जा दे दिया गया, लेकिन दुद्धी को मानक पूरा न करने की दलील देना उचित नहीं है। प्रदर्शन में प्रेमचंद यादव, आई जेड खान, कुलभूषण पांडेय, राकेश श्रीवास्तव, रामजी पांडेय, उमेश गुप्ता, पी सी गुप्ता, वीरेंद्र, रेणु आदि शामिल रहे।

दुद्धी को जिला बनाने की मांग का कारण

उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित दुद्धी को अलग जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। दुद्धी प्रदेश की एकमात्र तहसील है, जिसकी सीमाएं तीन राज्यों को जोड़ती हैं। प्रदेश के राजस्व में भी दुद्धी तहसील का बड़ा योगदान है। आदिवासी बहुल आबादी वाला दुद्धी प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट भी है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित प्रदेश की दोनों विधानसभा सीटें भी इसी क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल, आदिवासी आबादी की बहुलता, पिछड़ापन, मुख्यालय से दूरी सहित अन्य कारणों के चलते यहां के लोग दुद्धी को अलग कर नया जिला बनाने की मांग करते आ रहे हैं। दुद्धी जिला बनाओ संघर्ष समिति के संयोजन में इस मांग के समर्थन में पिछले डेढ़ दशक से आंदोलन चल रहा है। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है। 

दुद्धी को जिला बनाने की अभी कोई योजना नहीं

लंबे समय से दुद्धी को जिला बनाने की मांग कर रहे लोगों की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल दुद्धी को जिला बनाने की कोई योजना नहीं है। इसके लिए अक्तूबर 1992 में जारी शासनादेश के तहत जिला बनाने के मानकों को पूरा न करने को कारण बताया गया है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सपा के एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने दुद्धी के प्रबुद्ध वर्ग की ओर से उठाए जा रहे इस मांग को पिछले दिनों विधानसभा में अतारांकित प्रश्न के रूप में उठाया था।
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उन्होंने पूछा था कि क्या सोनभद्र की दुद्धी तहसील को जिला बनाने पर विचार किया जा रहा है, इसे कब तक जिला बनाया जाएगा। प्रश्न के जवाब में सरकार ने आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद की ओर से 16 मई को जारी पत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि 20 अक्तूबर 1992 को जनपद सृजन संबंधी शासनादेश में निर्धारित मानकों को दुद्धी तहसील पूरा नहीं करता। लिहाजा इसे जिला बनाना फिलहाल विचारणीय नहीं है। इस जवाब के बाद दुद्धी के लोगों में मायूसी छा गई है।
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