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पटरियों पर सामान, फिर क्यों न लगे जाम

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नगर की यातायात व्यवस्था में अतिक्रमण रोड़ा बना हुआ है। सड़क की पटरियों पर बाहर तक सामान निकाल दिए जाने से सड़कें संकरी हो जा रही हैं। इसके चलते रोजाना जाम की नौबत पैदा हो रही है। घंटों लोग जाम की समस्या से जूझ रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि बड़े वाहनों का प्रवेश नगर में प्रतिबंधित है। जिम्मेदार न तो अतिक्रमण से कराहती सड़कों को मुक्ति दिलाने की पहल कर रहे हैं और न ही जाम से निजात की कोई अन्य योजना बना रहे हैं। जाम का असर व्यापारियों के काम पर पड़ रहा है। लोग इससे आजिज हो गए हैं।
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गिट्टी-बालू लदे वाहनों की आवाजाही के कारण कुछ वर्षों पहले तक नगर में हर वक्त जाम लगा रहता था। इसके समाधान के लिए नगर के मध्य में करीब ढाई किमी लंबे फ्लाईओवर का निर्माण हुआ, ताकि भारी वाहन नगर के भीड़-भाड़ वाले इलाके में प्रवेश किए बिना ही बाहर से निकल जाएं। फ्लाईओवर निर्माण का असर कुछ वर्षों तक तो दिखा, लेकिन आबादी के साथ वाहनों के बढ़ते दबाव से जाम की समस्या फिर विकराल रूप लेने लगी है। बढ़ौली चौक से मेन मार्केट को जाने वाले मार्ग पर रामलीला मैदान, पुराना हास्पिटल मोड़, शीतला चौक, साईं मंदिर चौक, पूरब महाल को जाने वाली सड़क हर वक्त जाम से जकड़ी रहती है। इस इलाके में जाम का एक प्रमुख कारण सड़क की पटरियों पर अवैध अतिक्रमण भी है। कई स्थानों पर पटरियों को दुकानदारों ने सामान फैलाकर कब्जा रखा है तो उससे बचे स्थानों पर ठेला-खोमचा की दुकानें सज रही हैं। खरीदारी के लिए कोई ग्राहक पहुंचता है तो उसके वाहन भी सड़क की पटरी पर ही खड़े होते हैं। ऐसे में किसी दूसरे वाहन के आते ही नगर का बड़ा हिस्सा जाम से प्रभावित हो जाता है। जाम का असर लोगों के व्यापार पर भी पड़ रहा है। कई बार व्यापारी इसके समाधान की मांग उठा चुके हैं, लेकिन यातायात महकमा मौन साधे है।
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