सोनभद्र। पिछले दो दिनों से मौसम के बदले मिजाज के बीच सोमवार को तेज बारिश हुई। जिले के विभिन्न दोपहर बाद से बारिश का क्रम शुरू हुआ, जिसका असर देर शाम तक पूरे जिले में दिखा। करीब पौन घंटे तक हुई तेज बारिश ने छठ पूजा की रंगत बिगाड़ दी। घाटों को जाने वाले मार्ग पर कीचड़ और पानी लगने से श्रद्धालु परेशान रहे। वहीं खेतिहर वर्ग भी सकते में है। खेतों में तैयार हो चुकी धान की फसल को बारिश से भारी क्षति का अंदेशा जताया जा रहा है। बेमौसम बारिश को विशेषज्ञ चक्रवात मोंथा का असर मान रहे हैं।
मौसम विभाग की ओर से 28-29 अक्तूबर को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, मगर इससे पहले रविवार से ही मौसम बदल गया है। लगातार दूसरे दिन भी आसमान में बादल छाए रहे। सोमवार की सुबह हल्की बूंदाबादी भी हुई। दोपहर बाद छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र से बारिश शुरू हुई।
दुद्धी, बभनी, म्योरपुर, रेणुकूट, ओबरा, चोपन होते हुए देर शाम तक रॉबर्ट्सगंज में भी बारिश का असर दिखा। शाम करीब पौने छह बजे से शुरू हुई बारिश पौन घंटे तक जारी रही। छठ पूजा करने वाले श्रद्धालु बारिश के बीच ही घाटों से घर की ओर लौटते दिखे। घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर भी कीचड़, फिसलन ने परेशानी बढ़ाई। बुजुर्गों के मुताबिक इस मौसम में लंबे समय बाद इस तरह की बारिश हुई है।
पिछले कई वर्षों में छठ पूजा पर बारिश नहीं हुई थी, मगर इस बार ठीक पूजा के दिन बरसात ने व्यवस्थाओं को प्रभावित किया। हालांकि श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं दिखा। बारिश के बीच भी वह तालाब-सरोवर में खड़े होकर पूजा में लीन रहीं।
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धान, सरसों और आलू की फसलों को नुकसान
बेमौसम हुई बारिश से खेती के लिए काफी नुकसानदायक है। इससे सबसे ज्यादा असर धान की फसलों पर पड़ा है। सरसों और आलू की फसलें लेट हो जाएंगी। जिले के नगवां, चतरा क्षेत्र में पहले रोपाई के कारण धान की कटाई भी शुरू हो चुकी है। किसान खलिहान में धान एकत्रित किए हुए हैं। ऐसे में बारिश से खलिहान में रखी फसल भींग गई है। रॉबर्ट्सगंज, करमा, घोरावल क्षेत्र में फसल पककर तैयार है। किसान जल्द ही कटाई करने वाले थे, लेकिन बारिश के बाद इसमें देरी होने की आशंका है। फसल में कीट व रोग का प्रकोप भी बढ़ सकता है। पहाड़ी और ढ़लान वाले इलाकों में किसान इस समय आलू और सरसों की बोवाई के लिए अपने खेतों की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बारिश के कारण बोवाई भी प्रभावित होगी। बोवाई में देरी सीधे तौर पर पैदावार को प्रभावित कर सकती है।
इस बारिश से पक चुकी फसलों को नुकसान होगा। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों के जहां रबी की फसलों की बोवाई की तैयारी चल रही है, वहां किसानों को लाभ मिलेगा। -डॉ. एमपी सिंह, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र मंगुराही।
म्योरपुर में सोमवार की शाम हो रही बारिश के बीच भींगते हुए छठ घाट जाती व्रती महिलाएं, संवाद