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लिंगानुपात में पांच कदम दूर लेकिन टीकाकरण में आगे हैं सोनभद्र की लड़कियां

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लिंगानुपात में लड़कों की बराबरी से महज पांच कदम दूर जिले की लड़कियां टीकाकरण में आगे हैं। 12 से 17 वर्ष के बीच हुए टीकाकरण के दोनों चरणों में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या हर तरफ अधिक रही। चाहे स्कूल के कैंप में टीका लगवाना हो या अस्पताल पहुंचकर। लड़कियों ने बिना किसी डर के टीका लगवाया और खुद को प्रतिरक्षित कर स्वस्थ समाज का संदेश दिया। हालांकि टीकाकरण के मामले में लड़कों की स्थिति भी खराब नहीं है, मगर संख्या के आधार पर लड़कियों का रुझान अधिक है।
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12 से 14 वर्ष की आयु के किशोरों का टीकाकरण 16 मार्च से शुरू हुआ है। इससे पहले जनवरी से 15-17 आयु वर्ग का टीकाकरण आरंभ हुआ था। खास बात यह रही कि दोनों ही अभियान में टीकाकरण की शुरुआत लड़कियों को ही टीका लगाकर हुई। अन्य दिनों में भी सभी केंद्रों पर टीका लगवाने वालों में लड़कियों की संख्या ही अधिक रह रही है। मन से सारे भ्रम निकालकर लड़कियों ने टीकाकरण के प्रति अपनी जागरुकता प्रदर्शित की है। टीकाकरण केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों के अनुसार अगर सात बच्चों को टीका लगता है तो उनमें से चार से पांच किशोरियां होती हैं। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बनाए गए टीकाकरण केंद्र पर तैनात एएनएम ज्योति मौर्या ने बताया कि वैक्सीन लगवाने के लिए केंद्र पर लड़कों की अपेक्षा काफी संख्या में किशोरियां पहुंच रही हैं। आम तौर पर देखा जाता है कि लडकियों में टीके और सूई से डर और भ्रांति रहती है, मगर टीकाकरण में ऐसी कोई बात सामने नहीं आ रही है। जिले में तीन जनवरी से 15 से 17 वर्ष के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 130665 बच्चों को कोरोना टीका का लक्ष्य रखा गया है। इसकी अपेक्षा 117395 बच्चों को कोरोना टीका शनिवार तक दे दिया गया है। वहीं 12 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए 16 मार्च को टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। इनके लिए 78898 का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 1071 ने टीका लगवाया है। परीक्षाओं के कारण गति रुकी हुई है। जल्द ही इसमें इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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