सोनभद्र। आबादी के साथ बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जिले में पांच विद्युत नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे। रिवैंप बिजली सुधार योजना के तहत नए उपकेंद्र बनाने के लिए विभाग ने प्रस्ताव शासन को भेजा है। ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि भी की जाएगी। शासन से धन मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
जिले में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां आज भी लो-वोल्टेज की समस्या है। लोड अधिक होने के चलते बिजली ट्रिप होने की चुनौती बनी होती है। इससे निजात दिलाने के लिए बिजली विभाग की ओर से अब जिले में पांच नए उपकेंद्रों का निर्माण कराया जाएगा। विभाग की ओर से शासन को नए उपकेंद्र के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। इनके लिए जमीन की तलाश भी शुरू कर दी गई है। शासन से स्वीकृति मिलते ही स्टेशनों का निर्माण शुरू हो जाएगा। इन उपकेंद्रों के बनने से अन्य उपकेंद्रों के भार को कम किया जा सकेगा। वहीं उपकेंद्रों पर बढ़ने वाले लोड को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। विभाग की ओर से यह निर्णय पिछले कुछ वर्षों में जिले में बिजली की खपत में बढ़ोतरी और निजी नलकूपों के कनेक्शनों की बढ़ी संख्या और भार को देखते हुए लिया गया है। 33/11 केवी के पांच नए उपकेंद्र बनाने के लिए बभनौली, खैरपुर, कुशी, गुरूवल व एक विद्युत वितरण पिपरी खंड क्षेत्र का चयन किया गया है। एक उपकेंद्र की लागत दो से ढाई करोड के बीच होगी।
35 ट्रासंफार्मरों की बढ़ेगी क्षमता
बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए नए उपकेंद्र के साथ ट्रांसफार्मर की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। ओवरलोड से जूझते 35 ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि होगी। भार अधिक होने के कारण इन ट्रासंफार्मरों के बार-बार जलने की शिकायतें आती है। इसमें 25 केविए से लेकर 250 केबिए के ट्रासफार्मर हैं। इसके लिए विभाग की ओर से इस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। इनके बदले जाने से कई क्षेत्रों में हजारों उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
रिवैंप विद्युत सुधार योजना के तहत पांच नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे जिले में और अधिक गुणवक्ता पूर्ण बिजली आपूर्ति में मदद मिलेगी। उपकेंद्र के लिए जमीन तलाश की जा रही है। - आशुतोष श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता।
जिले में कुल 35 ट्रार्सफार्मरों की क्षमता वृद्धि की जाएगी। इससे हजारों लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं ट्रासफार्मर के जलने की संख्या में कमी आएगी। वहीं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। - एसके सिंह, अधिशासी अभियंता।