सूबे में मानसून का रुख बदलने के कारण कई दिनों से वर्षा न होने से चिलचिलाती धूप की मार झेलने को सभी मजबूर हैं। ऐसे में बारिश के दिनों में कम होने वाली बिजली की मांग का आंकड़ा एक बार फिर से नए रिकार्ड की ओर बढ़ने लगा है। शनिवार को बिजली की मांग 26312 मेगावाट दर्ज की गई।
कोयले की किल्लत झेल कर वापस अपने पायदान पर पहुंची परियोजनाओं के लिए मांग कम होने के दिनों में बिजली की मांग का रिकार्ड बनाना परियोजनाओं के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। परियोजनाओं की मानसून के दिनों में तेजी से कोयले का स्टॉक बढ़ाने की सोच बारिश न होने के कारण धरी की धरी रह गई। ऐसे में परियोजनाओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर दिनों दिन बढ़ती बिजली की मांग और दूसरी ओर रिहंद में लगातार पानी की कमी ने सभी को मुश्किल में डाल दिया है। शुक्रवार को बिजली की मांग ने एक बार फिर पिछले सभी रिकार्डों को ध्वस्त कर शनिवार को 26312 मेगावाट की मांग के साथ नया रिकार्ड दर्ज कराया। वहीं न्यूनतम मांग भी 17864 मेगावाट के आंकड़े पर पहुंच गई है। शनिवार को अचानक से बढ़ी बिजली की मांग के बाद सूबे की इकाइयों को फुल लोड पर चलाया गया। इस दौरान निगम की इकाइयों से 4412 व निजी क्षेत्र की इकाइयों से 6703 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया।