वनाधिकार के तहत अस्वीकृत दावों पर पुनर्विचार और ग्राम वन समितियों के पुनर्गठन को लेकर डीएम ने सोमवार को कलेक्ट्रेट में बैठक की। वन और राजस्व के अफसरों को समय सीमा में कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया। ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने को कहा जिन्हें नियमों का भलीभांति ज्ञान हो। जरूरत पड़ने पर टीम के सदस्यों को प्रशिक्षित करने की भी सलाह दी।
डीएम चंद्र विजय सिंह ने कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यता) अधिनियम व वन नियमावली के अंतर्गत लंबित अस्वीकृत दावों के रिव्यू का कार्य और वनाधिकार ग्राम वन समितियों के पुनर्गठन की कार्ययोजना एक सप्ताह के अंदर पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत जिन भी अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए उनका चार दिवसीय एक सामान्य प्रशिक्षण भी करा लिया जाए, जिससे उन्हें वनाधिकार से संबंधित पत्रावलियों के निस्तारण में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ग्राम वन समितियों के पुनर्गठन के बाद ग्राम समितियों का भी एक दिवसीय प्रशिक्षण कराया जाए। उन्होंने डीएफओ, एसडीएम, तहसीलदार को निर्देशित किया कि वह आपस में समन्वय स्थापित कर वनाधिकार अधिनियम से संबंधित पत्रावलियों का समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारण करना सुनिश्चित करें। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव को निर्देशित किया कि वनाधिकार से संबन्धित अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशिक्षण विकासखंडों में अति शीघ्र करा लें। बैठक में डीएफओ संजीव कुमार सिंह, एडीएम वित्त सहदेव मिश्र, एसडीएम रमेश कुमार, शैलेंद्र मिश्र, सेवाकुंज आश्रम बभनी के आनंद, आलोक चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।