जिला अस्पताल लोढ़ी में संचालित 100 बेड के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (जच्चा-बच्चा अस्पताल) में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा है। दिन हो या फिर रात यहां दर्द से कराहती महिलाओं के पहुंचने के साथ ही बिचौलिए सक्रिय हो जाते हैं और शुरू हो जाता है अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के नाम पर खेल। कहने को अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है।
शनिवार की रात में भी इस तरह का वाकया सामने आया, जब रात करीब ढाई बजे प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला अस्पताल पहुंची। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था होने के बाद भी न तो महिला का अल्ट्रासाउंड किया गया और न ही सही उपचार हुआ। अलबत्ता प्राइवेट सेंटरों में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पर्चा लिख दिया गया। तीमारदारों के पूछने पर वहां मौजूद डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों का कहना था कि उनके यहां सोमवार से शुक्रवार तक यानी सप्ताह में पांच दिन ही अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा उपलब्ध है। शनिवार और रविवार को अल्ट्रासाउंड नहीं होता है। जबकि सेवा प्रदाता कंपनी को सप्ताह के सभी दिन अल्ट्रासाउंड सहित अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया गया है। बता दें कि प्रदेश सरकार ने अक्तूबर 2019 में सेवा प्रदाता हेरिटेज इंस्टीट्यूट मेडिकल साइंस के जरिये सौ बेड के जच्चा-बच्चा अस्पताल का संचालन शुरू कराया था, ताकि गरीब जच्चा-बच्चा का बेहतर उपचार हो सकें। इसके एवज में सरकार सेवा प्रदाता को भुगतान किया जाता है। बावजूद इसके जच्चा-बच्चा को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। गरीबों को मुफ्त इलाज सुलभ कराने का सारा दावा यहां फेल होता दिख रहा है। मरीजों का यहां तक आरोप है कि दवाएं बाहर से लिखी जा रही है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करना पड़ रहा है।