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सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव का मना शहीदी पर्व

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श्रीगुरु सिंह सभा में शुक्रवार को सिखों के पांचवें गुरु श्रीगुरु अर्जुन देव जी का शहीदी पर्व मनाया गया। शहीदी पर्व को मनाने के लिए 40 दिनों तक सुखमनी साहब का पाठ हुआ। अखंड पाठ की समाप्ति के बाद भजन कीर्तन हुआ। इसके पश्चात लंगर का आयोजन हुआ।
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वाराणसी से आए रागी रकम सिंह व उनके साथियों ने भजन कीर्तन का गायन किया। वक्ताओं ने कहा कि दिव्य आत्माओं के शरीर में परमेश्वर की दिव्य ज्योति हमेशा प्रकाशमान रहती है। इतनी शक्ति आ जाती है कि कभी मृत्यु से भय नहीं लगता है। गुरु अर्जुन देव भी ऐसी हस्तियों में आते हैं, जिन्होंने मुगल शासक जहांगीर के अन्याय के विरोध, धर्म एवं आस्था के मूल्यांकन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। भारतीय समाज जहांगीर की धर्मांध नीतियों से त्रस्त था। ऐसे समय गुरु जी की गुरुवाणी व तेजस्वी व्यक्तित्व से समाज के अंदर एक नई प्रेरणा और विश्वास पैदा हो रहा था। जो कि जहांगीर को सहन नहीं हो रहा था। अंत में गुरु जी को गरम तवे पर बैठा कर गरम रेत डाल कर शहीद कर दिया गया। उन्होंने ने गुरुग्रंथ साहब का संपादन किया। गुरु साहब ने लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के केंद्र बिंदु श्रीहरिमंदिर साहब (स्वर्ण मंदिर) का निर्माण करवाया। गुरु का बलिदान हमें प्रेरित करता है कि किसी भी परिस्थिति में अन्याय, अत्याचार के आगे झुकना नहीं है, बल्कि प्राणों की बाजी लगाकर हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए। लंगर में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया व मीठे शर्बत का भंडारा चलाया गया।
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