वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। डीएम ने एडीएम न्यायिक भानु प्रताप यादव से घटना की मजिस्ट्रियल जांच कराई। एडीएम ने 12 अक्तूबर को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार बृजेश कुमार वर्मा को लापरवाही का दोषी पाया गया। तहसीलदार ने हिरासत में बकायेदार की तबीयत बिगड़ने जैसी गंभीर घटना के बावजूद अस्पताल जाना जरूरी नहीं समझा।
अलबत्ता कागजी प्रक्रिया कर बंदी को अस्पताल के लिए मुक्त कर दिया। किसी राजस्व कर्मी की भी ड्यूटी नहीं लगाई गई। यही नहीं, मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम कराए बिना परिजनों को शव अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। इस बारे में तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों को कोई सूचना भी नहीं दी।
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तत्कालीन एसडीएम राजेश कुमार सिंह ने भी इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया और न ही डीएम को सूचना दी। एडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार बृजेश कुमार वर्मा और एसडीएम राजेश सिंह को बंदी की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हुए गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया है। राबर्ट्सगंज कोतवाल बालमुकुंद मिश्र ने बताया कि सदर तहसीलदार सुनील कुमार की तहरीर पर शनिवार की रात केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करा दिया गया है।
पीड़ित पक्ष का कहना था कि मई की भीषण गर्मी में बंदी को हवालात में रखा गया। उसे पंखा, पानी, उपचार जैसी जरूरी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई। बंदी को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी गई। तपती दोपहरी में इस स्थिति के कारण हवालात में बंदी की मौत हुई।
मंडलायुक्त के नेतृत्व में चल रही जांच
राजस्व हवालात में संदिग्ध हालात में बंदी सुधाकर दुबे की मौत के मामले में शासन स्तर से भी उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। पिछले दिनों विंध्याचल मंडल के आयुक्त के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। मंडलायुक्त मुथुकुमार स्वामी, मिर्जापुर डीएम दिव्या मित्तल और सोनभद्र एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने शनिवार को जिले में पहुंचकर छानबीन की थी। घटना के संबंध में तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों से जानकारी ली। किन्हीं कारणों से सुधाकर दुबे के पुत्र नीरज दुबे व अन्य परिजन नहीं पहुंच सके थे। सोमवार को उनके बयान दर्ज होने की उम्मीद है।
इस मामले में मृतक के पुत्र नीरज दुबे की ओर से हाईकोर्ट में वाद दायर किया गया है। शुक्रवार को इसकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी ने अपर मुख्य सचिव राजस्व को दोषी अफसरों पर हुई कार्रवाई के संबंध में एक सप्ताह के अंदर शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। कोर्ट के सख्त रुख अपनाने के बाद तीन माह पुरानी जांच रिपोर्ट के आधार पर आननफानन मामले में तत्कालीन एसडीएम व तहसीलदार पर केस दर्ज कराया गया है।
राजस्व हवालात में सुधाकर दुबे की मौत के मामले में अफसरों पर केस दर्ज होने के बाद पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव विकास शाक्य ने इसे संघर्ष और न्याय की अधूरी जीत बताया। कहा कि निष्पक्ष विवेचना और सजा दिलाने तक का संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि राजस्व हवालात में बंदी सुधाकर दुबे की मौत प्रशासनिक लापरवाही और क्रूरता के कारण हुई थी, जिसका पोस्टमार्टम कराए बगैर शव को जलवा दिया गया। साक्ष्यों एवं सबूतों से भी छेड़छाड़ की गई। उन्होंने मृतक के पुत्र नीरज दुबे के साथ न्याय की लड़ाई शुरू करने के साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल कराई।
बंदी की मौत के मामले को प्रमुखता से उठाने वाले भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने इस मामले में जांच के दौरान दोषी पाए गए अफसरों के निलंबन की भी मांग की है। कहा कि तत्कालीन तहसीलदार और एसडीएम मामले में शुरू से ही लापरवाह रहे। अपनी गलती छिपाने के लिए परिवार पर भरपूर दबाव बनाया गया।
सही तथ्यों को छिपाया गया, जिस कारण कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हवालात में ही बंदी की मौत हो गई थी, लेकिन अफसर उल्टे यह कहते रहे कि परिवार वाले बंदी को लेकर भाग गए। अन्य छोटे मामलों में भी दबाव देकर पोस्टमार्टम कराने वाले अफसरों ने इस गंभीर प्रकरण में कोई तत्परता नहीं दिखाई। कहा कि भाजपा सरकार पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए हमेशा से तत्पर है।