अनपरा परियोजना की चौथी इकाई को अगले माह वृहद ओवरहॉलिंग के लिए शटडाउन लिया जाएगा। परियोजना प्रबंधन ने इस संबंध में उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम प्रबंधन को प्रस्ताव भेज दिया है।
कतिपय कारणों से समय पर ओवरहॉलिंग न हो पाना विद्युत इकाइयों के लिए कई प्रकार से समस्याएं उत्पन्न करता है। इससे जहां विद्युत उत्पादन कम होने के साथ ही मशीनों के ट्रिपिंग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं ईंधन की खपत बढ़ जाने से उत्पादन लागत में भी इजाफा हो जाता है। पिछले कई वर्षों से अनपरा परियोजना की 500 मेगावाट की चौथी इकाई का वृहद ओवरहॉलिंग नहीं हो पाया है। इससे उत्पन्न तकनीकी समस्याओं के कारण इकाई को मई 2020 से ही लगातार 40 मेगावाट कम लोड पर संचालित किया जा रहा है। अनपरा परियोजना के सीजीएम इं. आरसी श्रीवास्तव ने बताया कि परियोजना की 210 मेेगावाट की तीसरी इकाई भी ओवरहॉलिंग न हो पाने के कारण लंबे समय से कम लोड पर संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि चौथी इकाई के फरवरी में वृहद ओवरहालिंग के लिए उत्पादन निगम प्रबंधन को प्रस्ताव भेजा गया है। चौथी के बाद तीसरी इकाई की ओवरहॉलिंग की जाएगी।
सबसे सस्ती है अनपरा बी की बिजली
अनपरा बी की बिजली निगम की अन्य इकाइयों के सापेक्ष सर्वाधिक सस्ती है। अनपरा बी से पावर कारपोरेशन को जहां महज 2.27 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। वहीं अनपरा ए की बिजली 2.59, डी की 3.31 व सी लैंको परियोजना की बिजली 2.79 रूपये प्रति यूनिट की दर से प्राप्त होता है। ऐसे में पिछले 20 माह से अनपरा बी की चौथी इकाई को 40 मेगावाट कम लोड पर संचालित होने से प्रदेश वासी प्रतिदिन एक मिलियन यूनिट सस्ती बिजली से वंचित हो रहे हैं।