ठेका पद्धति बंद कर समायोजन की मांग कर रहे एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिला अस्पताल परिसर में 102 व 108 एंबुलेंस सेवा के वाहनों को खड़ा कर कर्मचारियों ने धरना दिया। चेतावनी दी कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती वह एंबुलेंस का संचालन नहीं करेंगे।
जिले में 102 सेवा के 22 और 108 सेवा के 24 वाहन हैं। हड़ताल में सभी का संचालन ठप रहा। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अश्विनी पांडेय ने कहा कि कोरोना काल में पूरी निष्ठा से बिना थके-रुके सेवा देने वाले एंबुलेंस कर्मचारियों की समस्याओं से सरकार बेफिक्र है। कर्मचारियों को ठेका प्रथा से मुक्ति दिलाने, कोरोना संक्रमण में दिवंगत एंबुलेंस कर्मचारियों के आश्रितों के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने, नेशनल हेल्थ मिशन के तहत महंगाई भत्ता देने, चार घंटे का ओवरटाइम देने की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार इसमें आनाकानी करती है तो आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा। विरोध प्रदर्शन में अवधेश कुमार, राज कुमार, पंकज कुमार, सुरेंद्र कुमार, सुरजीत, ज्ञान शंकर, पप्पू, राकेश कुमार, गोविंद, रामज्ञान यादव आदि मौजूद रहे।
निजी वाहन से अस्पताल पहुंचे मरीज
एंबुलेंस सेवाएं बंद होने से मरीजों की दुश्वारी बढ़ती जा रही है। दवा-इलाज के लिए दूर दराज से आने वाले मरीजों को निजी साधन या बस की मदद लेनी पड़ रही है। प्रसव पीड़िता भी परेशान हैं। जिला अस्पताल में उपचार कराने आए सुरेश, मोहन, पप्पू, सूरज, मयंक, संजय, चंदन, सुरेंद्र आदि ने बताया कि प्राइवेट वाहनों से किसी तरह दवा इलाज कराने मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे हैं। कई जगहों पर सार्वजनिक वाहन की सुविधा न होने से निजी वाहनों से मदद लेनी पड़ी।