कोटा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यो का निरीक्षण करते सीडीओ अमित पाल शर्मा।
- फोटो : SONBHADRA
मनरेगा में फर्जीवाड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को सीडीओ के औचक निरीक्षण में फिर इसकी पोल खुली। चोपन ब्लाक के कोटा ग्राम पंचायत में कच्ची सड़क निर्माण के लिए मस्टररोल में 52 श्रमिकों का जिक्र था जबकि मौके पर सिर्फ 27 श्रमिक ही काम करते मिले। कार्य से जुड़ा कोई बोर्ड भी नहीं लगा था। सीडीओ ने प्रधान, सेक्रेट्री और तकनीकी सहायक को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा है।
कोटा गांव में भूमि संरक्षण विभाग की ओर से मनरेगा योजना के तहत कार्य कराया जा रहा है। भूमि संरक्षण अधिकारी ने बताया कि 18 बंधियों के कार्य के लिए डीएमएफ से 24 लाख की धनराशि स्वीकृत है। इसके सापेक्ष 12 लाख रुपये अब तक प्राप्त हुआ है। बरसात में सभी चेकडैम भर जाने से क्षेत्र के लगभग 70 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। भूजल स्तर भी सुधरेगा। इसी गांव में प्रधानमंत्री आवास निर्माण सहित कुल 293 कार्यों पर 536 श्रमिकों का काम उपलब्ध कराने की बात बताई गई। इसी में चिंतामणि के घर तक 600 मीटर की लंबाई में कच्ची सड़क का निर्माण भी शामिल है। सीडीओ ने इसका मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो 52 श्रमिकों के मस्टररोल पर बस 27 ही काम करते मिले। तीन सौ मीटर काम हो चुका था लेकिन कोई भी बोर्ड नहीं लगाया गया था। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सीडीओ ने मौके पर उपस्थित सेक्रेट्री अमरेश चंद्र पटेल, ग्राम प्रधान प्रहलाद और तकनीकी सहायक कौशल पाठक से तीन दिवस में बीडीओ के माध्यम से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने मनरेगा में 20 से अधिक नियोजित श्रमिकों वाले कार्य स्थलों पर एमएमएस के माध्यम से अनिवार्य रूप से हाजिरी लगवाना सुनिश्चित करने का निर्देश उपायुक्त श्रम रोजगार को दिया।